

Iran Coup Threat Internal Turmoil Grows As Pezeshkian Faces Death Threats Over US Deal: अमेरिका के साथ जंग के बीच अब ईरान में बहुत ही भयानक अंदरूनी कलह शुरू हो गई है। देश के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान के भीतर अचानक से भारी टेंशन काफी ज्यादा बढ़ गई है। वहां अब एक बड़े तख्तापलट की गंभीर आशंकाएं बहुत ही तेजी के साथ जताई जाने लगी हैं। अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम को लेकर देश के सभी कट्टरपंथी धड़े इस कदर आगबबूला हो चुके हैं।
उन्होंने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और कई शीर्ष राजनयिकों के खिलाफ अब अपना बड़ा और खुला मोर्चा खोल दिया है। हालात इतने खराब हैं कि एक धार्मिक सभा में राष्ट्रपति को सरेआम गला काटने तक की भयानक धमकी दे दी गई है। जनाजे के जुलूस में वहां का माहौल गमगीन होने के बजाय पूरी तरह हिंसक और भारी राजनीतिक आक्रोश से भर गया। काले कपड़ों में पहुंचे हजारों प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के सामने ही समझौता करने वालों को मौत के नारे लगाए।
अमेरिका के साथ बातचीत की अहम कमान संभालने वाले विदेश मंत्री अब्बास अराघची को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। भीड़ के भयंकर गुस्से के कारण उन्हें वहां से अपनी जान बचाकर तुरंत ही भागना पड़ गया। कट्टरपंथियों की इस उग्र भीड़ ने अराघची पर पत्थरों से बहुत ही खतरनाक हमला भी किया। उन्होंने विदेश मंत्री को देश का सबसे बड़ा गद्दार और पूरी तरह से बिकाऊ तक कह दिया।
इस पूरे विवाद की जड़ में एक थ्योरी है, जो ईरान के कट्टरपंथी गुटों में बहुत ही तेजी से फैल रही है। अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया है। लेकिन मोजतबा पिछले काफी समय से सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह गायब हैं और कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि उन्हें जान का खतरा है, जबकि कुछ उन्हें शारीरिक रूप से अक्षम बता रहे हैं।
मोजतबा की इस रहस्यमयी गैर-मौजूदगी के बीच कट्टरपंथियों का आरोप है कि ईरान में एक गुपचुप तख्तापलट हो रहा है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति पेजेश्कियान, मुख्य वार्ताकार गालिबाफ और विदेश मंत्री मिलकर एक बड़ी साजिश कर रहे हैं। कट्टरपंथियों के अनुसार ये नेता सर्वोच्च नेता के आदेशों की धज्जियां उड़ाकर अमेरिका के ट्रंप प्रशासन से समझौता कर रहे हैं।
ईरान के भीतर यह आंतरिक संघर्ष इस कदर हिंसक हो चुका है कि राष्ट्रपति को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। एक धार्मिक नेता मोहम्मद अली बख्शी ने राष्ट्रपति पेजेश्कियान को सीधे शब्दों में बहुत ही गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर शर्तें पूरी नहीं हुईं तो हमारे हाथ में ब्लेड होगी और तुम्हारा गला होगा। इस बीच सरकार ने शोर मचाने वाले कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियान को राष्ट्रीय सुरक्षा समिति से तुरंत बाहर कर दिया है।
सांसद महमूद नबावियान पर आरोप था कि उन्होंने अमेरिका के साथ हो रही गुप्त वार्ता के दस्तावेजों को मीडिया में लीक किया। उन्होंने ऐसा करके इस अहम समझौते को पूरी तरह से तोड़ने की बहुत बड़ी और नाकाम कोशिश की थी। जेभ-ए-पायदारी से जुड़े ये कट्टरपंथी खुद को 1979 की इस्लामी क्रांति का असली और सच्चा पहरेदार मानते हैं। फिलहाल ईरान में सत्ता की यह भयंकर जंग बहुत ही खतरनाक और नाजुक मोड़ पर पूरी तरह पहुंच चुकी है।