

Iran Attacks Bahrain Kuwait News In Hindi: पश्चिम एशिया में एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी वर्चस्व की जंग ने अब एक खतरनाक मोड़ ले लिया है।
कल गुरुवार को अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के उत्तरी क्षेत्रों और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पुलों पर भीषण हमले किए जाने के बाद, तेहरान ने भी अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। जवाब में ईरान ने आज शुक्रवार तड़के खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों बहरीन, कतर और कुवैत पर जबरदस्त हवाई हमले किए हैं।
हैरानी की बात यह है कि अभी कुछ ही समय पहले दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए एक शांति समझौता हुआ था, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट में जारी सैन्य गतिविधियों और एक-दूसरे के खिलाफ अविश्वास ने इस समझौते को चंद दिनों में ही मटियामेट कर दिया।
अमेरिका ने बुधवार को ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी फिर से लागू कर दी, जिससे हालात बेकाबू हो गए। अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि वे ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए हमलों का दूसरा दौर शुरू कर चुके हैं।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, अमेरिकी हवाई हमलों में अब तक भारी तबाही हुई है। दक्षिणी होर्मुजगन प्रांत में पुलों को निशाना बनाकर किए गए हमलों में कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई। वहीं, ईरानी अधिकारियों ने दावा किया है कि ताजा अमेरिकी हमलों में अब तक 35 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 300 से अधिक घायल हुए हैं।
ईरान के कई प्रांत जैसे सेमनन, हमदान, खुजेस्तान और सिस्तान-बलूचिस्तान अमेरिकी हमलों की जद में आए हैं। बंदर अब्बास शहर के रिहायशी इलाकों और रेलवे जंक्शन पर हुए हमलों में भी कई लोग घायल हुए हैं।
ईरानी सेना के कर्नल इब्राहिम ज़ोलफ़गारी ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान की अभेद्य 'रेड लाइन' है और इसमें किसी भी विदेशी दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ईरान ने धमकी दी है कि अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर उनके बिजली संयंत्रों या पुलों पर हमले जारी रहे, तो ईरान पूरे क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर हमला करेगा। इससे पहले होर्मुज के बंद होने से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा जा चुका है।
इसी बीच रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों को भी रेड सी के तेल मार्ग को बंद करने के लिए कहा है। यदि मौजूदा तनाव और बढ़ता है, तो दुनिया एक बार फिर भीषण ऊर्जा संकट की चपेट में आ सकती है। फिलहाल, खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं और क्षेत्र में युद्ध के बादल घने होते जा रहे हैं।