जापान के आगे नरम पड़ा ईरान! समंदर में फंसे जहाजों को मिलेगा सुरक्षित रास्ता, बस माननी होगी यह एक शर्त

Iran Japan Shipping Agreement: ईरान ने जापान को होर्मुज जलडमरूमध्य से अपने जहाजों को गुजारने की अनुमति दे दी है। जापान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 90% कच्चे तेल के लिए इसी रास्ते पर निर्भर है।
Iran Softens Stance Toward Japan! Ships Stranded at Sea to Be Granted Safe Passage—But Only on One Condition
सांकेतिक एआई तस्वीर
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Iran Allows Japanese Ships Safe Passage Hormuz Strait: मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच एक बड़ी कूटनीतिक जीत की खबर सामने आई है। ईरान, जो अब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकियां दे रहा था अब अमेरिका के करीबी सहयोगी जापान को वहां से सुरक्षित रास्ता देने के लिए राजी हो गया है। यह फैसला चीन, भारत और पाकिस्तान के बाद जापान के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है।

ईरान का बदला रुख

जापान अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए पूरी तरह से मध्य-पूर्व पर निर्भर है, क्योंकि उसके 90 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल का आयात इसी जलमार्ग के जरिए होता है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद से यह रास्ता असुरक्षित हो गया था, जिससे जापान के कई तेल टैंकर समंदर में ही फंस गए थे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी के साथ बातचीत के बाद स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद नहीं है। अरागची ने कहा, 'यह केवल हमारे उन दुश्मनों के लिए बंद है जो हम पर हमला कर रहे हैं। बाकी देशों के लिए यह खुला है'।

सुरक्षित मार्ग के लिए रखी शर्त

ईरान ने जापानी जहाजों को रास्ता देने के साथ एक प्रक्रिया भी तय की है। अरागची के अनुसार, जापान को सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए ईरानी अधिकारियों से संपर्क करना होगा ताकि जहाजों के सटीक मार्ग का निर्धारण किया जा सके। इससे पहले ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने चेतावनी दी थी कि किसी भी अनधिकृत जहाज को 'आग के हवाले' कर दिया जाएगा जिससे वैश्विक शिपिंग में दहशत फैल गई थी।

वैश्विक दबाव और कूटनीति

यह नरमी तब आई है जब जापान, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूके जैसे देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस जलमार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए अमेरिका की मदद करने की बात कही थी। साथ ही, भारत, चीन और इराक जैसे देश भी ईरान से इस मुद्दे पर सीधी बातचीत कर रहे थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान से फोन पर बातचीत की थी, जिसमें उन्होंने शिपिंग रूट की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर हमलों को लेकर चिंता जताई थी। ईरान का यह कदम दर्शाता है कि वह युद्ध के बावजूद उन देशों के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखना चाहता है जो सीधे तौर पर उस पर सैन्य हमला नहीं कर रहे हैं।

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