प्रधानमंत्री मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

India-US Trade Deal: रूसी तेल खरीद पर ट्रंप के दावे ने छेड़ी नई बहस, क्या भारत रूस से तेल खरीदना करेगा बंद?

US India Agreement: भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा, हालांकि भारत सरकार ने इस पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

प्रिया सिंह

India-US interim Trade Agreement: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में एक महत्वपूर्ण अंतरिम व्यापार समझौता संपन्न हुआ है। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच टैरिफ कटौती और व्यापारिक सुगमता पर व्यापक सहमति बनी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी तेल खरीद को लेकर किए गए दावे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। भारत सरकार ने फिलहाल इस विवादास्पद मुद्दे पर अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया है।

व्यापार समझौते की घोषणा

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस नए व्यापार समझौते के महत्वपूर्ण ढांचे की विस्तृत जानकारी साझा की है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 25 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर अब 18 फीसदी कर दिया है। ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए इस टैरिफ कटौती की घोषणा की ताकि दोनों देशों के बीच भविष्य का व्यापार बढ़ सके।

रूसी तेल पर ट्रंप का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी रूसी तेल नहीं खरीदने पर पूरी तरह सहमत हो गए हैं। उनके अनुसार भारत अब अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस के बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदेगा। ट्रंप के इस दावे के बाद भारत की भविष्य की ऊर्जा नीति और रूस के साथ कूटनीतिक संबंधों पर बड़े सवाल उठने लगे हैं।

भारत का आधिकारिक रुख

भारत सरकार की तरफ से ट्रंप के इन बयानों और दावों पर अब तक कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया या ठोस स्पष्टीकरण नहीं आया है। विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत सरकार की सर्वोच्च और प्राथमिक जिम्मेदारी है। हालांकि, यह तेल भविष्य में रूस से आएगा या अमेरिका से, इस पर आधिकारिक प्रवक्ता ने कोई भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी है।

अमेरिका की सख्त चेतावनी

ट्रंप प्रशासन ने अपने नए आदेश में चेतावनी दी है कि अगर भारत रूसी तेल खरीदना जारी रखता है तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी। अगर अमेरिकी वाणिज्य मंत्री को रूसी तेल खरीद के सबूत मिलते हैं, तो 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को दोबारा लगाया जा सकता है। यह धमकी दर्शाती है कि अमेरिका भारत को रूसी ऊर्जा स्रोतों से पूरी तरह दूर करने के लिए काफी गंभीर और आक्रामक है।

रक्षा सहयोग पर सहमति

तेल विवाद के बीच ट्रंप के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत आने वाले दस वर्षों में अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाएगा। यह समझौता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ऐतिहासिक रूप से रक्षा उपकरणों के लिए रूस पर बहुत अधिक निर्भर रहा है। अब भारत अपनी सैन्य जरूरतों के लिए अमेरिकी तकनीक और आधुनिक हथियारों की ओर अधिक रुख करने की योजना बना रहा है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का असर

फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदकर अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा कर रहा था। पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए स्वतंत्र फैसले लिए हैं। हाल के हफ्तों में रूसी तेल के आयात में कमी आई है, लेकिन इसके पीछे की असली वजह अभी तक स्पष्ट नहीं है।

ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती

भारत के लिए अपनी विशाल जनसंख्या की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना एक बहुत बड़ी और संवेदनशील चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत पूरी तरह रूसी तेल बंद करता है, तो उसे वैकल्पिक स्रोतों से तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी। बाजार की परिस्थितियों और घरेलू कीमतों को ध्यान में रखते हुए ही भारत सरकार इस दिशा में अगला बड़ा कदम उठाएगी।

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