होराइजन यूरोप से जुड़ने का रास्ता साफ! भारत-EU ने बातचीत पूरी की, रिसर्चर के लिए नई उम्मीदें

EU-INDIA MoU: भारत ने होराइजन यूरोप में जुड़ने के लिए बातचीत पूरी कर ली है। इससे शोधकर्ताओं और इनोवेटर्स के लिए एक-दूसरे के साथ और अधिक निकटता से काम करने, नई तकनीकें विकसित करने के नए अवसर खुलेंगे।
india-EU Delegation meeting
भारत-EU के प्रतिनिधि के बीच बातचीतसोर्स- सोशल मीडिया
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Highlights

  • भारत ने होराइजन यूरोप से जुड़ने के लिए बातचीत पूरी की

  • अनुसंधान के क्षेत्र में भारत नहीं ऊंचाई छूने के लिए तैयार

  • 15 जुलाई की बैठक के बाद बातचीत की प्रक्रिया शुरू हुई

Horizon Europe Programme: भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने होराइजन यूरोप से भारत के जुड़ने के लिए बातचीत सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। 'होरिजोन यूरोप', यूरोपीय संघ का प्रमुख अनुसंधान और नवाचार कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम से भारत का जुड़ना, दोनों पक्षों के बीच अनुसंधान सहयोग के एक दीर्घकालिक संस्थागत ढांचे की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।

यह कदम विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग पर भारत-यूरोपीय संघ समझौते तथा 'भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद' के तहत पहले से चल रही अनुसंधान एवं विकास (R&D) परियोजनाओं और सहयोग को और आगे बढ़ाएगा।

इस पहल से दोनों देशों को फायदा

इस जुड़ाव से भारतीय शोधकर्ताओं, संस्थानों और उद्योगों को 'होरिजोन यूरोप' कार्यक्रम के तहत फंडिंग के अवसरों में भाग लेने और सहयोगी अनुसंधान परियोजनाओं के माध्यम से काम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, उन्हें यूरोपीय संघ के शोध समूहों और अत्याधुनिक अनुसंधान बुनियादी ढांचे तक पहुंच प्राप्त होगी। इससे प्रतिभाओं की आवाजाही बढ़ेगी और महत्वपूर्ण तकनीकों, मानकों तथा समाधानों का बड़े पैमाने पर संयुक्त विकास संभव हो सकेगा।

वैज्ञानिक क्षमताओं को मजबूत करेगा

होराइजन यूरोप के दूसरे स्तंभ (Pillar II) में स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, उद्योग और अंतरिक्ष, जलवायु, ऊर्जा और गतिशीलता, खाद्य तथा जैव-अर्थव्यवस्था जैसे विषय शामिल हैं। ये विषय भारत की अनुसंधान प्राथमिकताओं से काफी मेल खाते हैं और भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को और मजबूत कर सकते हैं। 'विकसित भारत 2047' की ओर बढ़ते हुए, यह जुड़ाव देश के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण मूल्य जोड़ेगा।

15 जुलाई के बैठक के बाद बातचीत

इस संभावित जुड़ाव पर विचार-विमर्श 27 जनवरी, 2026 को हुए ऐतिहासिक 'भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन' के बाद शुरू हुआ था। इसके बाद, 15 जुलाई, 2026 को ब्रुसेल्स में आयोजित 'व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद' की मंत्रिस्तरीय बैठक के परिणामस्वरूप इस संबंध में औपचारिक बातचीत शुरू की गई।

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए व्यवस्था

होरिजोन यूरोप, अनुसंधान और नवाचार के लिए EU का प्रमुख फंडिंग कार्यक्रम है। 'मल्टीएन्युअल फाइनेंशियल फ्रेमवर्क' की मध्यावधि समीक्षा के निर्णय के अनुसार, 2021-2027 की अवधि के लिए अनुमानित फंडिंग राशि 93.5 बिलियन यूरो है।

यह जलवायु परिवर्तन से निपटने, संयुक्त राष्ट्र के 'सतत विकास लक्ष्यों' को प्राप्त करने में मदद करता है, और EU की प्रतिस्पर्धात्मकता तथा विकास को बढ़ावा देता है।