FDI पर भारत की नई रणनीति! पड़ोसी देशों के निवेश प्रस्तावों को मिली क्लियरेंस, बदले गए पुराने नियम

India FDI Approval: भारत सरकार ने चीन और अन्य पड़ोसी देशों से आने वाले विदेशी निवेश प्रस्तावों को 60 दिनों के भीतर मंजूरी देने के लिए 40 विशेष उप-क्षेत्र निर्धारित किए हैं।
India FDI Approval: India Clears Foreign Investment Policy For Neighboring Nations 
40 विदेशी निवेश प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए (सोर्स-सोशल मीडिया)
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India FDI Approval, India Clears Foreign Investment Policy: भारत सरकार ने पड़ोसी देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों को लेकर एक बहुत ही विग BSDI फैसला लिया है। सरकार ने चीन और भूमि सीमा साझा करने वाले अन्य देशों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी दी है। इस नए नियम के तहत इन प्रस्तावों को अब 60 दिनों के भीतर मंजूरी मिल सकेगी। इस महत्वपूर्ण पहल से देश के कई खास क्षेत्रों में निवेश और विकास के नए रास्ते खुलेंगे।

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने इन विदेशी निवेश प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए एक विस्तृत प्रक्रिया तय की है। नई मानक संचालन प्रक्रिया का पालन चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों पर होगा। इसके अलावा भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान से आने वाले निवेश प्रस्तावों पर भी यही नियम पूरी तरह लागू किए जाएंगे। इस बड़े फैसले से देश की अर्थव्यवस्था को और ज्यादा मजबूती मिलने की पूरी उम्मीद है।

भारतीय नागरिकों का रहेगा नियंत्रण

सरकार ने इस नई नीति के तहत निवेश को लेकर अपनी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। इसके अनुसार विदेशी निवेश प्राप्त करने वाली भारतीय कंपनी में बहुलांश हिस्सेदारी हमेशा भारतीय नागरिकों के पास ही रहेगी। विदेशी कंपनियों को मालिकाना हक नहीं मिलेगा और पूरा नियंत्रण भारतीय स्वामित्व वाली इकाइयों के पास सुरक्षित रहेगा।

40 उप-क्षेत्रों की हुई पहचान

सरकार ने इस एफडीआई निवेश के लिए कुल 40 महत्वपूर्ण उप-क्षेत्रों को विशेष रूप से चिन्हित किया है। इनमें मुख्य रूप से पूंजीगत वस्तु विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कलपुर्जा विनिर्माण जैसे अहम क्षेत्र शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही पॉलिसिलिकॉन और वेफर से जुड़े उद्योगों को भी इस नई सूची में प्रमुखता से जगह दी गई है। इन 40 क्षेत्रों में उन्नत बैटरी घटक और दुर्लभ खनिज स्थायी चुंबक के प्रसंस्करण को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा मशीन टूल्स, डिस्प्ले घटक, कैमरा मॉड्यूल और इलेक्ट्रॉनिक कैपेसिटर जैसे क्षेत्रों में भी निवेश होगा। स्पीकर, माइक्रोफोन, लिथियम-आयन बैटरियां और वेयरेबल उपकरणों के निर्माण के लिए भी विदेशी निवेश को मंजूरी दी गई है।

ऊर्जा और संयंत्रों के लिए निवेश

सरकार द्वारा जारी सूची में ताप, जल और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए कास्टिंग और फोर्जिंग भी शामिल हैं। इसके साथ ही इन्सुलेशन सामग्री और दुर्लभ धातु निर्माण को भी विदेशी निवेश के लिए पूरी तरह खोला गया है। यह नीति देश के ऊर्जा और तकनीकी बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित करने में बहुत ज्यादा सहायक साबित होगी।

विदेशी निवेश को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने बहुत सख्त रिपोर्टिंग नियम भी तय किए हैं। इसके तहत निवेश से जुड़ी हर जानकारी विदेशी मुद्रा प्रबंधन विनियम 2019 के अनुरूप ही दी जाएगी। इससे देश की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी और किसी भी तरह की संभावित गड़बड़ी को आसानी से रोका जा सकेगा।

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रिजर्व बैंक के पास होगी जानकारी

इस नए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जुड़ी सभी अहम जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक को भी पूरी तरह उपलब्ध कराई जाएगी। इससे देश की बैंकिंग प्रणाली को विदेशी धन के प्रवाह पर सीधी नजर रखने में काफी ज्यादा मदद मिलेगी। यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित और मजबूत बनाए रखने के लिए बहुत ही जरूरी माना जा रहा है।

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