भारत से अमेरिका जाने वालों के लिए खुशखबरी (कांसेप्ट फोटो सौ. सोशल मीडिया)
वाशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन ने एच-1बी वीजा के नियमों में ढील दी है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियों के लिए विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करना आसान हो जाएगा और एफ-1 छात्र वीजा को आसानी से एच-1बी वीजा में तब्दील किया जा सकेगा। इस कदम से हजारों भारतीय प्रौद्योगिकी पेशेवरों को फायदा होने की संभावना है।
सबसे अधिक मांग वाला एच-1बी वीजा एक गैर-अप्रवासी वीजा है। जिसके तहत अमेरिकी कंपनियों को ऐसे विशेष व्यवसायों में विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने की अनुमति मिलती है, जिनमें व्यावसायिक या प्रौद्योगिकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
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प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत और चीन जैसे देशों से हर वर्ष हजारों कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए इस वीजा पर निर्भर रहती हैं। होमलैंड सुरक्षा विभाग (डीएचएस) द्वारा घोषित इस नियम का उद्देश्य विशेष पदों और गैर-लाभकारी व सरकारी अनुसंधान संगठनों के लिए परिभाषा और मानदंडों को आधुनिक बनाकर नियोक्ताओं और श्रमिकों को अधिक सुविधा प्रदान करना है।
इन बदलावों से अमेरिकी नियोक्ताओं को अपनी व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार नियुक्तियां करने और वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद मिलेगी। इस नियम में एफ-1 वीजाधारक छात्रों के लिए कुछ सुविधा का भी प्रावधान है। जो अपने वीजा को एच-1बी में बदलना चाहते हैं।
USCIS के निदेशक उर एम. जादौ ने कहा – एच-1बी वीजा कार्यक्रम 1990 में कांग्रेस की ओर से बनाया था और इसमें कोई शक नहीं है कि हमारे देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए इसे आधुनिक बनाने की जरूरत थी। इसके साथ ही 0नए नियम 17 जनवरी 2025 से लागू होंगे। उसके बाद वीजा की सभी याचिकाओं के लिए गैर-आप्रवासी कर्मचारी को फॉर्म I-129 का नया वर्जन भरना पड़ेगा। USCIS के द्वारा से डीएचएस के पास कानूनी रूप से प्रति वर्ष 65,000 एच-1बी वीजा जारी करने का अधिकार है। इसके साथ उन्नत डिग्री वाले आवेदकों को अतिरिक्त 20,000 वीजा प्रदान किया जाता है।