दुनिया के 8 देशों में अलग अलग मामलों को लेकर चल रहे प्रदर्शन
स्पेन, पाकिस्तान और इजराइल में पीएम की कुर्सी पर दिख रहा है संकट
फ्रांस और चिली में शिक्षा व्यवस्था को लेकर मचा हुआ है बवाल
Political Crisis in World: दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को लेकर जन-आक्रोश फूट पड़ा है। अक्टूबर के महीने में कम से कम आठ प्रमुख देशों में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन देखे जा रहे हैं। इन वैश्विक प्रदर्शनों की वजह से तीन देशों के प्रधानमंत्रियों की कुर्सी पर संकट मंडराने लगा है। कहीं लोग लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए सड़कों पर हैं, तो कहीं शिक्षा और बजट में कटौती को लेकर बवाल मचा हुआ है।
भारत के कई प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और पुणे में मतदाता सूची के साथ-साथ SIR प्रक्रिया और चुनावी सुधारों को लेकर विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष इन प्रदर्शनों को आगे बढ़ा रहा है। विपक्ष का कहना है कि यह लड़ाई वोट के अधिकार को सुरक्षित रखने और देश में लोकतंत्र को बचाने की है। इसके अलावा कई अन्य राजनीतिक दलों के नेता भी इन सुधारों के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं।
फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत कई हिस्सों में सार्वजनिक खर्चों में कटौती, जीवन-यापन के बढ़ते खर्च और शिक्षा व्यवस्था में कमियों के खिलाफ 'ब्लॉक एवरीथिंग' नाम से विशाल प्रदर्शन हो रहे हैं। यहां लोग शिक्षकों की भारी कमी और बजट में कटौती को लेकर खफा हैं। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के इस्तीफे की मांग तक कर रहे हैं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि यहां शिक्षा सुधार के नाम पर कट्टरपंथी तत्व प्रदर्शनों को बढ़ावा दे रहे हैं।
पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर उनके समर्थक देशव्यापी आंदोलन कर रहे हैं। खैबर पख्तूनख्वा के पूर्व सीएम सोहेल अफरीदी द्वारा मार्च की घोषणा के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया और इलाके में आपातकाल जैसी पाबंदियां लगा दी गईं। इमरान के समर्थक वर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जिससे सरकार की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
स्पेन की राजधानी मैड्रिड में बढ़ते आवास संकट और लोगों को बेदखल किए जाने के खिलाफ बड़ा आंदोलन छिड़ा हुआ है। यूनिवर्सिटी फंडिंग की कमी भी युवाओं के असंतोष का मुख्य कारण बनी है। जनता के इस भारी आक्रोश को देखते हुए स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने समय से पहले ही चुनाव कराने का बड़ा फैसला लिया है। अचानक चुनाव की घोषणा से सांचेज की अपनी सत्ता और पीएम की कुर्सी पर गहरा संकट खड़ा हो गया है।
यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन में लगातार फिलिस्तीन के समर्थन में और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मुद्दों को लेकर बड़े-बड़े जुलूस निकाले जा रहे हैं। इन प्रदर्शनों के समानांतर राइट विंग समूहों के लोग भी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। अलग-अलग विचारधाराओं के आमने-सामने आने के कारण ब्रिटेन में कानून-व्यवस्था बनाए रखना वहां के प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
इजराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आंतरिक और सुरक्षा नीतियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा लगातार फूट रहा है। राजधानी तेल अवीव में 7 अक्टूबर को नेतन्याहू के खिलाफ विशाल प्रदर्शन हुआ, जिसमें उन पर 7 अक्टूबर 2023 के हमले के दौरान बड़ी लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए। 24 अक्टूबर को एक बार फिर बड़े प्रदर्शन की तैयारी है। यह आंदोलन इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अक्टूबर के अंत में इजराइल में प्रधानमंत्री पद के चुनाव होने हैं।
दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना और चिली में छात्र समुदाय भारी विरोध-प्रदर्शन कर रहा है। चिली में शिक्षा बजट में भारी कटौती किए जाने के खिलाफ छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतर आए हैं। वहीं अर्जेंटीना में भी सरकारी विश्वविद्यालयों की फंडिंग रोकने और आर्थिक तंगी के चलते छात्र और आम नागरिक प्रदर्शन कर रहे हैं। दोनों ही देशों की सरकारें छात्रों को शांत करने और आर्थिक संतुलन बनाने के बीच फंसी हुई नजर आ रही हैं।
म्यांमार में तख्तापलट के बाद से ही सैन्य शासन के खिलाफ आम जनता की आवाजें और प्रतिरोध लगातार जारी हैं। लोग लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दूसरी ओर, कोलंबिया में अक्टूबर के दौरान सरकार की जन-विरोधी नीतियों और सामाजिक अधिकारों में कटौती के विरोध में बड़े पैमाने पर लोग सड़कों पर उतरे हैं।
कुल मिलाकर देखें तो इस समय दुनिया के कई देशों में सरकारें जनता के तीखे सवालों और विरोध के घेरे में हैं और लोग घरों में बैठकर विरोध करने के बजाय आंदोलन करते हुए सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं।