G7 Strategic Oil Release 100 Million Barrels: अमेरिका में आगामी मिडटर्म चुनावों से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारी दबाव के बाद G7 देशों ने एक बहुत बड़ा वैश्विक कदम उठाया है। ग्रुप ऑफ सेवन (G7) के सदस्य देशों ने अपने आपातकालीन वैश्विक भंडार से 10 करोड़ बैरल डीजल और कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी करने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही सभी सदस्य देशों ने यह साझा संकल्प लिया है कि वे वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए ऊर्जा के निर्यात पर किसी भी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगाएंगे।
यह समन्वित कदम अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के माध्यम से उठाया जाएगा। इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने यूरोपीय संघ को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि यूरोप ने अपने आपातकालीन डीजल भंडार से सप्लाई नहीं बढ़ाई, तो अमेरिका डीजल निर्यात पर रोक लगा सकता है, जिससे यूरोपीय अर्थव्यवस्था को भारी क्षति पहुँचती। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब वैश्विक तेल भंडार खोला गया है; मार्च में भी ईरान युद्ध के बाद IEA की अगुवाई में रिकॉर्ड 40 करोड़ बैरल तेल जारी किया जा चुका है।
अमेरिका ने यूरोपीय संघ से अपने आपातकालीन तेल भंडार का इस्तेमाल करने की मांग की थी। ट्रंप प्रशासन की ओर से चेतावनी दी गई थी कि अगर यूरोप ने अपने भंडार से तेल नहीं निकाला तो अमेरिका डीजल निर्यात पर रोक लगाने जैसे कदम पर विचार कर सकता है।
यूरोप के लिए यह स्थिति इसलिए अहम है क्योंकि वह पहले की तुलना में अमेरिकी डीजल पर ज्यादा निर्भर हो गया है। अगर अमेरिका से डीजल की सप्लाई कम होती है तो यूरोपीय देशों में ईंधन की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
आपात स्थिति में रणनीतिक तेल भंडार से कच्चा तेल निकालने का यह पहला मामला नहीं है। ईरान युद्ध के बाद मार्च में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA के नेतृत्व में करीब 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति बनी थी। इसे अब तक की सबसे बड़ी आपातकालीन तेल रिलीज बताया गया था।
G7 देशों ने साझा बयान में कहा है कि पहले किए गए वादों और अब तक जारी किए जा चुके तेल को ध्यान में रखते हुए IEA के जरिए 10 करोड़ बैरल तेल की समन्वित रिलीज की जाएगी।
इसका मतलब है कि संबंधित देश आपस में तालमेल बनाकर बाजार में अतिरिक्त तेल उपलब्ध कराएंगे। इस कदम का मकसद बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ाना और ईंधन की कीमतों पर पड़ रहे दबाव को कम करना है।
इस पूरे मामले में एक सवाल अभी भी बना हुआ है। IEA के कार्यकारी निदेशक फतिह बिरोल ने इसी सप्ताह बताया था कि सदस्य देश मार्च में हुए 40 करोड़ बैरल वाले समझौते का करीब दो-तिहाई हिस्सा पहले ही जारी कर चुके हैं।
ऐसे में उस पुराने समझौते का लगभग एक-तिहाई तेल अभी जारी होना बाकी है। अब G7 की नई घोषणा के बाद बाजार में यह भी देखा जाएगा कि अतिरिक्त तेल की सप्लाई से कीमतों पर कितना असर पड़ता है।
G7 का यह फैसला ऐसे समय आया है जब तेल और ईंधन की कीमतों को लेकर दबाव बना हुआ है। रणनीतिक भंडार से तेल जारी करने का उद्देश्य बाजार में सप्लाई बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश करना है।
अमेरिकी प्रशासन के लिए भी ईंधन की कीमतें एक अहम मुद्दा हैं। हालांकि इस फैसले के आर्थिक और बाजार संबंधी असर को लेकर अलग-अलग परिस्थितियां महत्वपूर्ण रहेंगी।