पुराने घाव फिर कुरेदेंगे ट्रंप! एक जिद से खतरे में 40 देशों का भविष्य, ग्रीनलैंड पर US खुद सवालों के घेरे में

Trump On Greenland: ट्रंप का ग्रीनलैंड पर दावा केवल कूटनीति नहीं, बल्कि खतरनाक उपनिवेशवादी सोच है। अगर उनकी दलील मानी गई तो अमेरिका समेत दुनिया के 40 देशों का इतिहास और भविष्य संकट में पड़ सकता है।
Trump will reopen old wounds! One man's stubbornness jeopardizes the future of 40 countries, and the US itself is under scrutiny over Greenland.
पुराने घाव फिर कुरेदेंगे ट्रंप, कॉन्सेप्ट फोटो
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Trump Greenland Plan Explain: डोनाल्ड ट्रंप का ग्रीनलैंड को लेकर दिया गया हालिया बयान महज एक भू-राजनीतिक बयानबाजी नहीं है, बल्कि यह उस 'उपनिवेशवादी' सोच को दोबारा हवा दे रहा है जहां ताकतवर देश दूसरों की जमीन पर अपना हक जताते थे।

ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर 500 साल पुरानी बात याद दिलाकर दुनिया के उन तमाम देशों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है, जिनकी नींव 'खोज और जहाजों' के आधार पर रखी गई थी।

रूस-चीन का डर या कब्जे की मंशा?

न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि वे ग्रीनलैंड को लेकर कुछ बड़ा करने जा रहे हैं, चाहे डेनमार्क को यह पसंद हो या नहीं। उनके इस रुख के पीछे का तर्क यह है कि यदि अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कदम नहीं बढ़ाया, तो रूस या चीन उस पर कब्जा कर लेंगे। ट्रंप का कहना है कि वे रूस या चीन को अपने पड़ोसी के तौर पर बर्दाश्त नहीं करना चाहते।

ट्रंप की 500 साल वाली विवादास्पद दलील

डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क के दावे को चुनौती देते हुए कहा कि महज इसलिए कि 500 साल पहले उनकी एक नाव वहां पहुंच गई थी, इसका मतलब यह नहीं है कि वे उस जमीन के मालिक हो गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी नावें भी वहां गई होंगी। विशेषज्ञ इस बयान को बेहद आपत्तिजनक मान रहे हैं क्योंकि यह तर्क खुद अमेरिका की जड़ों पर प्रहार करता है।

खुद अमेरिका के लिए आत्मघाती है यह सोच?

अगर ट्रंप की बात को सही मान लिया जाए तो सवाल उठता है कि क्या यह तर्क उन व्हाइट अमेरिकियों पर भी लागू होगा जिनके पूर्वज यूरोप से आए थे? बता दें कि 1492 में क्रिस्टोफर कोलंबस ने ही अमेरिका से यूरोप का संपर्क स्थापित किया था जिसके बाद वहां उपनिवेशीकरण शुरू हुआ। यदि 'खोज' के आधार पर मालिकाना हक खत्म होता है तो अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के करोड़ों लोगों को अपने पूर्वजों के मूल देशों में लौटना पड़ सकता है।

40 देशों पर पड़ेगा असर

दुनिया के नक्शे पर नजर डालें तो करीब 40 देश ऐसे हैं जहां कभी न कभी विदेशी खोजकर्ता अपनी नावें लेकर पहुंचे और वहां शासन स्थापित किया।

एशिया और अफ्रीका: 1498 में वास्को द गामा भारत पहुंचे थे और बाद में पुर्तगाली ब्राजील, अंगोला और इंडोनेशिया तक गए।

ओशिनिया: डच खोजकर्ताओं ने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की राह खोजी थी।

अमेरिका: स्पैनिश और ब्रिटिश खोजकर्ताओं ने मेक्सिको, पेरू, फिलीपींस और अमेरिका के पूर्वी तटों पर अपना दावा ठोका था।

ट्रंप के इस बयान ने इतिहास की उस कहानी को फिर से बहस के केंद्र में ला दिया है जिसे दुनिया पीछे छोड़ चुकी थी। यदि खोजकर्ताओं के आधार पर जमीनों का बंटवारा दोबारा शुरू हुआ तो वैश्विक स्थिरता पूरी तरह चरमरा जाएगी।

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