भारत को चीन मत समझो! टैरिफ की धमकी पर अपने ही देश में घिरे डोनाल्ड ट्रंप, मचा बवाल

US India trade tension: पूर्व राजदूत और रिपब्लिकन नेता निक्की हेली ने कहा कि चीन को बार-बार रियायत दी जा रही है, जबकि भारत जैसे भरोसेमंद साझेदार पर अनावश्यक दबाव डाला जा रहा है।
Trump imposed tariffs on India even after it bought more oil and gas from the US
डोनाल्ड ट्रंप, ( सोर्स- सोशल मीडिया)
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Trump tariff threat: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को रूस से तेल खरीदने पर चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि आने वाले 24 घंटों में वे भारत पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं। हालांकि, उनके इस बयान की आलोचना खुद अमेरिका में हो रही है। रिपब्लिकन नेता, पूर्व राजदूत और साउथ कैरोलाइना की गवर्नर रह चुकीं निक्की हेली ने ट्रंप की इस धमकी की आलोचना करते हुए कहा कि भारत और चीन को एक ही नजर से देखना ठीक नहीं है। उन्होंने ट्रंप को सलाह दी कि भारत के साथ रिश्तों को खराब न करें।

भारतीय मूल की नेता निक्की हेली ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत को रूस से तेल खरीदने से रोका जा रहा है, जबकि चीन जो अमेरिका का विरोधी है और रूस व ईरान से सबसे अधिक तेल खरीदता है उसे 90 दिनों की टैरिफ छूट दे दी गई है। उन्होंने अपील की कि चीन को ऐसी रियायतें न दी जाएं और भारत जैसे भरोसेमंद साझेदार के साथ रिश्ते खराब न किए जाएं।

रूस से तेल खरीद पर जताई नाराजगी

मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए भारत की रूस से तेल खरीद पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत यूक्रेन युद्ध को अनदेखा कर रहा है और रूस की युद्ध नीति को समर्थन दे रहा है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि इसके जवाब में अमेरिका भारत पर लगने वाले टैरिफ (आयात शुल्क) को "बहुत अधिक" बढ़ाने वाला है। उन्होंने लिखा, "भारत को कोई परवाह नहीं कि रूस की युद्ध मशीन यूक्रेन में कितने लोगों की जान ले रही है।"

साझेदारों को धमकाने की कोशिश

सोमवार को भारत ने ट्रंप की टिप्पणी को "एकतरफा और अनुचित आरोप" बताया और साथ ही अमेरिका और यूरोपीय संघ पर भी निशाना साधा। भारत ने कहा कि जो देश अब रूस से दूरी बनाने की सलाह दे रहे हैं, वही पहले खुद रूस के साथ व्यापक व्यापारिक संबंध रखते थे।

मंगलवार को रूस ने भी भारत का समर्थन करते हुए बयान दिया कि जो देश रूस के व्यापारिक साझेदारों को धमकाने की कोशिश कर रहे हैं, वे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा, "हम इस तरह की धमकियों को स्वीकार नहीं करते। ये देश केवल अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए दबाव बना रहे हैं।"

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