क्या ईरान में रातों-रात हथियार लेके पहुंचे 4 चीनी विमान? खाड़ी देशों से लेकर वाशिंगटन तक मचा हड़कंप

Chinese Cargo Planes Iran Landing: ईरान में 4 चीनी विमानों के रहस्यमयी तरीके से लैंड होने की खबरों ने खलबली मचा दी है। इस घटना के बाद अब अमेरिका-ईरान शांति वार्ता समझौते पर खतरा मंडराने लगा है।
Did Four Chinese Aircraft Arrive in Iran Overnight Carrying Weapons? The Development Sparks a Frenzy from the Gulf States to Washington.
शी जिनपिंग, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Chinese Cargo Planes Iran Landing Middle East Crisis: मिडिल ईस्ट में तनावपूर्ण माहौल के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने वाशिंगटन से लेकर बीजिंग तक हड़कंप मचा दिया है। अपुष्ट रिपोर्टों के अनुसार, पिछले 48 घंटों के भीतर चीन के चार मालवाहक विमानों ने उड़ान के दौरान अपने ट्रांसपोंडर बंद कर दिए (वेंट डार्क) और गुप्त तरीके से ईरान में लैंडिंग की है।

हालांकि अब तक किसी भी सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह खबर सच साबित होती है तो मिडिल ईस्ट की पूरी कूटनीतिक बिसात बदल जाएगी।

ट्रंप-शी जिनपिंग भरोसे की परीक्षा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आश्वासन दिया है कि बीजिंग ईरान को किसी भी प्रकार के हथियारों की आपूर्ति नहीं करेगा। यह आश्वासन ही इस अस्थिर कूटनीतिक माहौल में स्थिरता का एकमात्र स्तंभ बना हुआ था। यदि इन विमानों के जरिए हथियार या सैन्य उपकरण (जैसे गोला-बारूद) भेजे जाने की पुष्टि होती है तो राष्ट्रपति ट्रंप पर घरेलू राजनीति और कांग्रेस की ओर से चीन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भारी दबाव बनेगा।

शांति वार्ता पर संकट के बादल

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और ईरानी अधिकारियों के बीच हाल ही में तेहरान में मुलाकात हुई थी, ताकि 21-22 अप्रैल को खत्म होने वाले सीजफायर से पहले दूसरे दौर की शांति वार्ता शुरू की जा सके। लेकिन चीन द्वारा ईरान को सैन्य मदद पहुंचाने की खबरों ने इस बातचीत के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। अमेरिका के लिए ऐसी स्थिति में बातचीत की मेज पर बैठना मुश्किल होगा जहां उसका वैश्विक प्रतिद्वंद्वी चीन, उसके दुश्मन ईरान को फिर से हथियारों से लैस कर रहा हो।

ईरान का बढ़ता आत्मविश्वास

कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि तेहरान को बीजिंग से निरंतर आपूर्ति का भरोसा मिलता है, तो वह यूरेनियम संवर्धन और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी मांगों के सामने झुकने से इनकार कर सकता है। इससे ईरान के उन कट्टरपंथियों को मजबूती मिलेगी जो लंबे समय से अमेरिकी दबाव के खिलाफ डटे रहने की वकालत कर रहे हैं।

हवाई मार्ग से अमेरिकी नाकेबंदी को चुनौती

अमेरिका ने 13 अप्रैल से ईरानी बंदरगाहों की सख्त समुद्री नाकेबंदी (Blockade) कर रखी है जिसमें अब तक 10 से अधिक जहाजों को वापस भेजा जा चुका है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग (CENTCOM) के अनुसार, यह नाकेबंदी केवल समुद्री जहाजों पर लागू होती है, विमानों पर नहीं। चीन द्वारा हवाई मार्ग का उपयोग करना संभवतः अमेरिकी सैन्य प्रवर्तन की सीमाओं को परखने की एक सोची-समझी रणनीति है।

चीन की रणनीतिक अस्पष्टता

विशेषज्ञों के अनुसार, चीन इस समय 'रणनीतिक अस्पष्टता' (Strategic Ambiguity) का खेल खेल रहा है। इन विमानों में हथियार हों या न हों, लेकिन ऐसी खबरों का फैलना ही अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को उलझाने और वाशिंगटन का ध्यान भटकाने के लिए काफी है। फिलहाल, पूरी दुनिया 21 अप्रैल की समयसीमा का इंतजार कर रही है जब यह तय होगा कि शांति का रास्ता खुलेगा या क्षेत्र एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ेगा।

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