ताइवान पर टकराव तेज, चीन ने जापानी पीएम के खास दूत पर लगाया कड़ा बैन; संपत्ति कुर्क करने का दिया आदेश

China Taiwan Tension: ताइवान की यात्रा से नाराज चीन ने जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची के करीबी सलाहकार केइजी फुरुया पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। बीजिंग ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है।
Tensions over Taiwan Escalate: China Imposes Strict Sanctions on Japanese PM's Special Envoy; Orders Seizure of Assets
केइजी फुरुया, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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China Sanctions Japanese Lawmaker: चीन और जापान के बीच ताइवान के मुद्दे पर कड़वाहट एक नए स्तर पर पहुंच गई है। बीजिंग ने सोमवार को जापानी सांसद और प्रधानमंत्री साने ताकाइची के करीबी सहयोगी केइजी फुरुया पर कड़े प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह कदम फुरुया द्वारा ताइवान की 'स्वतंत्रता समर्थक' ताकतों के साथ कथित मिलीभगत के जवाब में उठाया गया है। यह घटनाक्रम उस समय आया है जब ताइवान को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति पहले से ही गर्माई हुई है।

संपत्ति होगी फ्रीज

चीनी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केइजी फुरुया के चीन में प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही, चीन में मौजूद उनकी सभी चल और अचल संपत्तियों को फ्रीज करने का आदेश दिया गया है। बीजिंग ने फुरुया पर आरोप लगाया है कि उन्होंने चीन के कड़े विरोध के बावजूद ताइवान का दौरा किया और वहां के अलगाववादी तत्वों को बढ़ावा दिया। चीन ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और विदेशी राजनेताओं की वहां की किसी भी आधिकारिक यात्रा को अपनी 'वन चाइना' नीति का उल्लंघन मानता है।

'वन चाइना' का उल्लंघन

केइजी फुरुया एक सर्वदलीय जापान-ताइवान संसदीय समूह के प्रमुख हैं वो अक्सर ताइवान की यात्राएं करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते से मुलाकात की थी जिसे चीन ने अपनी क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ एक 'गंभीर हस्तक्षेप' माना है। चीनी मंत्रालय का कहना है कि फुरुया की हरकतें चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करती हैं और द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा रही हैं। दूसरी ओर ताइवान की सरकार बीजिंग के संप्रभुता के दावों को सिरे से खारिज करती रही है।

जापानी सांसद का पलटवार

इन प्रतिबंधों पर प्रतिक्रिया देते हुए केइजी फुरुया ने जापानी संसद में कहा कि ताइवान का दौरा करना उनके संसदीय समूह का एक स्वाभाविक और नियमित कार्य है। उन्होंने चीन की कार्रवाई पर तंज कसते हुए कहा कि वे दशकों से मुख्य भूमि चीन नहीं गए हैं और वहां उनकी कोई संपत्ति भी नहीं है जिसे जब्त किया जा सके। जापान के राजनीतिक गलियारों में इस प्रतिबंध को एक प्रतीकात्मक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है जिसका उद्देश्य जापान को ताइवान के करीब जाने से रोकना है।

कैसे बिगड़ते रिश्ते

टोक्यो और बीजिंग के बीच संबंध पिछले साल नवंबर से ही काफी खराब चल रहे हैं। तनाव तब शुरू हुआ जब जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने सुझाव दिया था कि ताइवान पर किसी भी संभावित चीनी हमले की स्थिति में जापान सैन्य प्रतिक्रिया दे सकता है। इससे पहले भी चीन ने ताइवान से जुड़े बयानों के लिए चीन में जन्मे जापानी सांसद सेकी हेई पर प्रतिबंध लगाए थे। मौजूदा स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य और राजनयिक तनाव और बढ़ सकता है।

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