BRICS में 90% व्यापार अपनी करेंसी में, रूस ने की भारत की जमकर तारीफ, डॉलर का वर्चस्व खत्म

Local BRICS Trade: दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत और रूस ने राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार का नया रिकॉर्ड बनाया है, जिससे अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को बड़ी चुनौती मिली।
Expanding Local BRICS Trade
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन(सोर्स - सोशल मीडिया)
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Expanding Local BRICS Trade: दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत और रूस के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। रूस के मुताबिक, दोनों देशों के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार का करीब 96% भुगतान अब रुपये और रूबल में किया जा रहा है।

वहीं BRICS देशों के साथ रूस के करीब 90% भुगतान स्थानीय मुद्राओं में होने का दावा किया गया है। इसे वैश्विक व्यापार में डॉलर पर निर्भरता घटाने और भुगतान व्यवस्था में विविधता लाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

BRICS Summit 2026 होगा भारत मंडपम में

नई दिल्ली के भारत मंडपम में 11 से 13 सितंबर 2026 तक 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष BRICS संगठन अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर रहा है, इसलिए सम्मेलन को वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को लेकर दुनिया भर में चर्चा है। ऐसे में BRICS देशों के बीच व्यापार और वित्तीय सहयोग सम्मेलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है।

BRICS देशों के साथ 90% भुगतान स्थानीय मुद्रा में

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि रूस और BRICS देशों के बीच करीब 90% भुगतान अब राष्ट्रीय मुद्राओं में किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य सीधे तौर पर अमेरिकी डॉलर को खत्म करना नहीं है।

पेस्कोव के मुताबिक, स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल का मकसद अंतरराष्ट्रीय भुगतान के तरीकों में विविधता लाना है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ पश्चिमी देश अपनी राष्ट्रीय मुद्रा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत-रूस व्यापार में रुपये और रूबल का दबदबा

भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों में भी स्थानीय मुद्रा व्यापार तेजी से बढ़ा है। वरिष्ठ रूसी बैंकरों के अनुसार, दोनों देशों के कुल द्विपक्षीय व्यापार का लगभग 96% भुगतान अब रुपये और रूबल में हो रहा है।

पेस्कोव ने यह भी कहा कि रूस में जमा अतिरिक्त भारतीय रुपये से जुड़ी पुरानी व्यावहारिक समस्याओं को धीरे-धीरे सुलझा लिया गया है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक भुगतान को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिल सकती है।

BRICS बनाम G7 की बदलती आर्थिक तस्वीर

वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS की भूमिका भी लगातार बढ़ी है। साल 2000 में वैश्विक GDP में BRICS देशों की हिस्सेदारी करीब 23% थी, जबकि G7 की हिस्सेदारी लगभग 52% थी। 2024 तक विस्तारित BRICS की हिस्सेदारी बढ़कर 36.8% बताई गई, जबकि G7 की हिस्सेदारी 29% से कम रह गई।

अनुमानों के अनुसार, 2025 में BRICS देशों की औसत आर्थिक विकास दर 3.8% और 2026 में 3.7% रह सकती है।

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BRICS Pay और मोदी-पुतिन बैठक पर नजर

दिल्ली सम्मेलन के दौरान BRICS देशों के घरेलू भुगतान नेटवर्क को आपस में जोड़ने वाली BRICS Pay प्रणाली को लेकर भी उम्मीदें हैं। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सीमा-पार भुगतान को आसान बनाना और वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था को मजबूत करना है।

वहीं, 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादेमीर पुतिन के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक पर भी दुनिया की नजर रहेगी। बैठक में व्यापार, दुर्लभ खनिजों की खोज और भारत को रूसी Su-57 लड़ाकू विमानों की संभावित बिक्री जैसे रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

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