इजरायल में भारतीय मजदूरों पर हमला (सोर्स- सोशल मीडिया)
Indian Workers Attacked in Israel: इजरायल के दक्षिणी शहर एश्केलोन में दो भारतीय कामगारों पर हमला हुआ है। इजरायली पुलिस ने हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया है। भारत में स्थित इजरायली दूतावास ने कहा कि आरोपी लोगों को पकड़ा गया है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब प्रधानमंत्री नरेंद मोदी जल्द ही इजरायल का दौरा करने वाले हैं।
इजरायली मीडिया के अनुसार यह हमला योजनाबद्ध और लक्षित था। इसके चलते इसे प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल दौरे से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पीएम मोदी अगले हफ्ते इजरायल का दौरा कर सकते हैं। पीएम के दौरे की बात खुद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में अपने एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान दी थी।
KAN न्यूज चैनल ने हमले की वीडियो क्लिप जारी की है, जिसमें तीन लोगों का एक समूह सार्वजनिक पार्क में दो भारतीय कामगारों पर हमला करता दिख रहा है। वीडियो में कैप्शन में कहा गया कि हमला नस्लवाद और दुर्भावना से प्रेरित था और इसे पहले से योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया। TRT वर्ल्ड के अनुसार हमलावरों ने वॉट्सएप के जरिए पहले से हमले की योजना बनाई थी।
Thank you Superintendent Morad Maginda,for tracing the criminals who attacked Indian workers in Israel and bringing them to justice. pic.twitter.com/DFnfLhzce2 — Khalid Baig (@KhalidBaig85) February 19, 2026
इजरायल ने हमले की कड़ी निंदा की है। भारत में इजरायली दूतावास ने कहा कि एश्केलोन में यह हमला बिल्कुल अस्वीकार्य है और दोषियों को सजा दी जाएगी। पीएम मोदी के दौरे को देखते हुए इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से घायलों की स्थिति स्पष्ट करने और इजरायली अधिकारियों के सामने मुद्दा उठाने की मांग की है।
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इजरायल में भारतीय कामगारों की मांग लगातार बढ़ रही है। अक्टूबर 2023 में हमास के हमलों के बाद इजरायली सरकार ने फिलिस्तीनी मजदूरों के परमिट रद्द कर दिए थे, जिससे वर्कफोर्स की कमी हो गई। इसके बाद इजरायल ने भारत से मजदूरों को बुलाया। 2025 तक 20,000 से अधिक भारतीय नागरिक इजरायल में काम कर रहे थे। भारतीय कामगारों को अच्छी सैलरी (लगभग ₹1.9 लाख प्रति माह), रहने की उचित व्यवस्था, मेडिकल इंश्योरेंस और सोशल सिक्योरिटी जैसी सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन उन्हें संघर्ष वाले क्षेत्रों में काम करने का जोखिम भी झेलना पड़ता है।