पहले पेट्रोल बम अटैक फिर ढाका यूनिवर्सिटी में तोड़फोड़...एक की मौत, बांग्लादेश में थम नहीं रहा बवाल

Bangladesh News: बांग्लादेश में बुधवार को ये दो बड़ी घटनाएं ऐसे समय पर हुई हैं, जब पूर्व PM खालिदा जिया का बेटा तारिक रहमान गुरुवार को बांग्लादेश लौट रहा है। रहमान 15 वर्षों से लंदन में रह रहा था।
Bangladesh Violence
ढाका यूनिवर्सिटी में तोड़फोड़ (Image- Social Media)
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Bangladesh Violence: बांग्लादेश की राजधानी ढाका में बुधवार रात को विश्वविद्यालय परिसर में हिंसा भड़क उठी, जब एक शख्स ने विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक मधुर कैंटीन में तोड़फोड़ करना शुरू कर दिया। यह घटना पेट्रोल बम हमले के कुछ घंटे बाद हुई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

यह घटना बुधवार रात करीब 10 बजे की है, जब एक व्यक्ति ने ढाका विश्वविद्यालय की मधुर कैंटीन में तोड़फोड़ शुरू कर दी। उस व्यक्ति ने काजी नजरुल इस्लाम के नारे लगाते हुए कैंटीन की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया। विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों ने उसे तुरंत पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया।

1971 के मुक्ति संग्राम का केंद्र कैंटीन

मधुर कैंटीन का इतिहास बांग्लादेश के आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ है। 1921 में मधुसूदन डे द्वारा स्थापित, यह कैंटीन बांग्लादेश के भाषा आंदोलन और 1971 के मुक्ति संग्राम का केंद्र बन चुकी है। 1971 में ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के दौरान पाकिस्तानी सेना ने मधुसूदन डे की हत्या कर दी थी, तब से यह कैंटीन बांग्लादेश के इतिहास का एक अहम हिस्सा बन गई है।

पेट्रोल बम से हमला

इससे पहले, उसी दिन बुधवार शाम को ढाका के मोघबाजार क्षेत्र में एक पेट्रोल बम से हमला किया गया था, जिसमें एक व्यक्ति, सैफुल सियाम की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह बम एक फ्लाईओवर से फेंका गया था और सैफुल की मौत वहीं पर हो गई।

"वह चाय पीने के लिए हमारे पास आया था। तभी एक जोरदार धमाका हुआ और मैंने उसे जमीन पर गिरते हुए देखा," फारुक, जो चाय बेचते हैं, ने घटना के बारे में बताया। "उसके सिर से खून बह रहा था और वह पूरी तरह से खून से सना हुआ था।" सैफुल सियाम एक स्थानीय ऑटोमोबाइल एक्सेसरी दुकान में काम करता था। पुलिस के अनुसार, वह पास की दुकान से कुछ खरीदने गया था और उसी दौरान बम हमले का शिकार हो गया।

पुलिस सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है और हमलावरों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। फिलहाल इस हमले के पीछे की मंशा का पता नहीं चल पाया है। ढाका में राजनीतिक तनाव के बीच यह घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, और स्थिति लगातार बिगड़ रही है।

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