पाकिस्तान में अब नई टेंशन का जन्म, बलोच लड़ाकों की नई रणनीति ने मचाया हड़कंप; जानें क्या है पूरा मामला

बलोच लिबरेशन आर्मी ने बलूचिस्तान के सुराब शहर पर कब्जा कर लिया है। पाकिस्तान, जो कभी आतंकवाद का समर्थन करता था, अब वह खुद भयंकर अलगाववाद से जूझ रहा है।
पाकिस्तान में अब नई टेंशन का जन्म, बलोच लड़ाकों की नई रणनीति ने मचाया हड़कंप; जानें क्या है पूरा मामला
पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान का सुराब शहर अचानक सबसे बड़ी चिंता का विषय बना
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बलूचिस्तान: पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान का सुराब शहर अचानक सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गया है। बलोच लड़ाकों ने दावा किया है कि उन्होंने इस अहम शहर पर पूरा कब्जा जमा लिया है। यह वही इलाका है जो क्वेटा से बेहद करीब है और पाकिस्तान की रणनीतिक धुरी माने जाने वाले क्वेटा-कराची हाईवे के पास स्थित है। अगर यह इलाका लंबे समय तक बलोच विद्रोहियों के हाथ में रहा तो न केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पर असर पड़ेगा, बल्कि चीन के सहयोग से चल रहे आर्थिक प्रोजेक्ट CPEC की राह भी मुश्किल में पड़ सकती है।

बलोचिस्तान पाकिस्तान के लिए लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ है, लेकिन सुराब जैसे अहम शहर पर कब्जा इस लड़ाई को नई दिशा दे सकता है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह बड़ी चुनौती है कि किस तरह से वो एक रणनीतिक इलाके को फिर से नियंत्रण में लें। इस घटना ने पाकिस्तान की सेना और खुफिया तंत्र की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब पाकिस्तान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तक सामने नहीं आई है।

सुराब पर कब्जा क्यों है इतना बड़ा अलार्म

सुराब शहर भले ही छोटा है, लेकिन उसकी रणनीतिक स्थिति बेहद अहम है। यह बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा से सिर्फ 150 किलोमीटर दूर है और पाकिस्तान के लिए जरूरी क्वेटा-कराची हाईवे पर बसा है। पहले भी इस हाईवे को बंद किया जा चुका है और अब फिर से इसके प्रभावित होने की आशंका है। यही हाईवे CPEC के लिए भी महत्वपूर्ण है, ऐसे में सुराब का जाना सीधे इस मेगा प्रोजेक्ट पर खतरे की घंटी बन सकता है।

बलोच लड़ाकों ने जताया कब्जे का दावा

बलोच लड़ाकों ने दावा किया है कि सुराब के सभी सरकारी दफ्तर अब उनके कब्जे में हैं और शहर में पाकिस्तान सरकार की कोई पकड़ नहीं बची है। अभी तक पाकिस्तान की तरफ से कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह एक बड़ी सैन्य और राजनीतिक विफलता मानी जाएगी। यह वही बलूचिस्तान है, जिसने पहले भी खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर घोषित करने की कोशिश की थी।

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