ऑस्ट्रियाई चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर का भारत दौरा (सोर्स- सोशल मीडिया
Austrian Chancellor India Visit: ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर अपने चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर बुधवार को भारत पहुंच गए हैं। उनके इस बेहद महत्वपूर्ण दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच शानदार ऑस्ट्रियाई चांसलर की भारत यात्रा को पूरी तरह सफल बनाना है। हवाई अड्डे पर युवा मामले और खेल मंत्री रक्षा खडसे ने उनका बहुत ही गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। यह दौरा दोनों देशों के बीच व्यापार और नई तकनीक जैसे क्षेत्रों में मजबूत साझेदारी का एक नया रास्ता खोलेगा।
Austria के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर साल 2025 में अपना पद संभालने के बाद पहली बार एशिया के दौरे पर आए हैं। यह उनका भारत का भी पहला आधिकारिक दौरा है जो पूरे चार दिनों तक चलने वाला है। उनके साथ एक बहुत ही उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी इस खास यात्रा पर भारत आया हुआ है।
इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कई खास मुद्दों पर बातचीत करेंगे। दोनों देशों के बीच मुख्य रूप से व्यापार, भारी निवेश और ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर फोकस रहेगा। इसके अलावा एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे नए क्षेत्रों में भी अच्छे मौके तलाशे जाएंगे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर इस दौरे को लेकर अपनी खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि भारत और Austria के बीच हमेशा से ही बहुत अच्छे और दोस्ताना संबंध रहे हैं। चांसलर स्टॉकर के इस नए दौरे से ‘बेहतर भारत-ऑस्ट्रिया पार्टनरशिप’ को भविष्य में बहुत बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
भारत और Austria के बीच यह ऐतिहासिक दौरा पिछले साल की गई एक महत्वपूर्ण यात्रा का ही सीधा परिणाम है। दरअसल साल 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी Austria का एक बहुत ही शानदार दौरा किया था। उस दौरे से दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच जो मोमेंटम बना था उसे अब और आगे बढ़ाया जा रहा है।
इससे पहले 12 दिसंबर 2025 को वियना में भारत और Austria के बीच एक बहुत अहम बैठक हुई थी। इस फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन के आठवें राउंड में दोनों देशों ने आपसी संबंधों के पूरे दायरे की बारीकी से समीक्षा की थी। विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज और ऑस्ट्रिया के निकोलस मार्शिक ने इस महत्वपूर्ण चर्चा में मुख्य रूप से हिस्सा लिया था।
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इस वर्तमान दौरे में आपसी फायदे के अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी बहुत विस्तार से चर्चा की जाएगी। भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों को और ज्यादा मजबूत करने के नए तरीकों पर भी विचार-विमर्श होगा। यह नई साझेदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक और आर्थिक सहयोग के कई सारे नए और बेहतरीन रास्ते खोलेगी।