Asim Munir Pakistan Provinces Proposal: पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने देश को 15 अलग-अलग हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव पेश किया। मुनीर के प्रस्ताव के तहत पाकिस्तान में 12 से 15 नए प्रांत बनाए जा सकते हैं। एक विकल्प में 160 छोटे प्रशासनिक क्षेत्र बनाने की भी बात है। पाकिस्तान में फिलहाल चार प्रांत पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान हैं।
पाकिस्तान क्षेत्रफल की दृष्टि से दुनिया का 33वां सबसे बड़ा देश है। हालांकि, इसमें सिर्फ चार प्रांत है। उसमें भी सबसे अधिक 12.8 करोड़ लोग अकेले पंजाब में रहते हैं, जो पाकिस्तान की कुल आबादी का करीब 50 प्रतिशत है। ऐसे में पंजाब जैसे बड़े राज्य का प्रशासन चलाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। जबकि बलूचिस्तान क्षेत्रफल के लिहाज से देश का सबसे बड़ा प्रांत है। लेकिन यहां आबादी केवल डेढ़ करोड़ ही है।
पाकिस्तान को 12 से 15 प्रांतों में बांटने का सबसे बड़ा कारण प्रशासनिक सुविधाओं के समय से ग्रामीण इलाकों तक नहीं पहुंच पाने को बताया जा रहा है। द इकोनॉमिस्ट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब के ग्रामीण इलाकों में सरकारी सुविधाएं समय से नहीं पहुंच पाती हैं और स्थानीय लोगों को सरकारी सेवाओं के लिए घंटों सफर करना पड़ सकता है। इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पंजाब की एक चौथाई से कम आबादी को घर पर साफ पीने का पानी नियमित रूप से मिलता है।
आसिम मुनीर ने यह प्रस्ताव पेश करते हुए तर्क दिया है कि बड़े प्रांतों को प्रभावी तरीके से चलाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि हालांकि पाकिस्तान की आर्थिक समस्याओं की वजह सिर्फ प्रशासनिक ढांचा नहीं है। देश पहले से ही कमजोर आर्थिक विकास, महंगाई और भारी कर्ज से जूझ रहा है।
जानकारी के मुताबिक, आसिम मुनीर का मानना है कि चार बड़े प्रांतों को कई हिस्सों में बांटकर समस्या को दूर किया जा सकता है। साथ ही इससे सत्ता का संतुलन बदल सकता है। माना जा रहा है कि अगर इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाता है, तो इससे नए प्रांत केंद्र सरकार पर ज्यादा निर्भर हो सकते हैं। जिससे सेना और केंद्र के लिए उन्हें काबू में करना आसान होगा।
इस प्रस्काव का सबसे अधिक असर पंजाब और सिंध प्रांत पर पड़ेगा। क्योंकि पाकिस्तान के प्रमुख शहर जैसे लाहौर, कराची, हैदराबाद और रावलपिंडी इन्हीं प्रांतों में आते हैं। इसके अलावा पंजाब और सिंध ही वे प्रांत है जहां प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) दूसरे प्रांतों से मजबूत मानी जाती है।
मुनीर और शहबाज शरीफ सरकार के लिए खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं। खैबर पख्तूनख्वा को इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) का गढ़ माना जाता है। वर्तमान में खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी हैं, जो PTI से ही आते हैं।
इमरान के तख्तापलट के बाद से ही खैबर पख्तूनख्वा में आर्मी और केंद्र सरकार को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा बलूचिस्तान में बार-बार उठती आजादी की मांग और विद्रोहियों के हमलों में पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में मुनीर इन प्रांतों को बांटकर इन्हें कमजोर कर देना चाहते हैं।
खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के अलावा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लंबे समय से शासन, महंगाई, टैक्स और आर्थिक हालात को लेकर असंतोष की स्थिति देखी गई है। ऐसे में पीओके को बांटने का फैसला पाकिस्तान सरकार पर ही भारी पड़ सकता है।