लेखिका अरुंधति रॉय (सौजन्य एएनआई)
लंदन : बुकर पुरस्कार से सम्मानित लेखिका अरुंधति रॉय को अपने निर्भीक और मुखर लेखन के लिए गुरुवार को ब्रिटेन के प्रतिष्ठित पेन पिंटर पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया। इस पुरस्कार के लिये इस वर्ष की विजेता घोषित होने पर रॉय ने खुशी जाहिर की है। एक समारोह में 10 अक्टूबर को रॉय को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। रॉय 14 साल पहले कश्मीर के बारे में दिए गए अपने बयानों को लेकर फिलहाल मुकदमे का सामना कर रही हैं।
साल 2009 में इंग्लिश पेन नामक चैरिटी द्वारा स्थापित यह पुरस्कार नोबेल पुरस्कार विजेता नाटककार हेरोल्ड पिंटर की स्मृति में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए दिया जाता है। 62 वर्षीय रॉय ने पेन पिंटर पुरस्कार के लिये इस वर्ष की विजेता घोषित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। अरुंधति रॉय ने कहा, “मुझे पेन पिंटर पुरस्कार स्वीकार करते हुए बहुत खुशी हो रही है। काश हेरोल्ड पिंटर आज हमारे बीच होते और दुनिया में हो रहे समझ से परे घटनाक्रमों के बारे में लिखते। चूंकि वह नहीं हैं, इसलिए हममें से कुछ लोगों को उनका स्थान लेने की कोशिश करनी चाहिए।”
रॉय को यह अवॉर्ड तब मिलने जा रहा है जबकि कुछ दिन पहले ही दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने उनके खिलाफ UAPA (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून) के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। इस साल के निर्णायक मंडल ने पेन पिंटर पुरस्कार के लिए अरुंधति रॉय के नाम का चयन किया। निर्णायक मंडल में इंग्लिश पेन के अध्यक्ष रुथ बोर्थविक, अभिनेता व कार्यकर्ता खालिद अब्दुल्ला और लेखक व संगीतकार रोजर रॉबिन्सन शामिल हैं। ब्रिटिश लाइब्रेरी की सह-मेजबानी में आयोजित समारोह में 10 अक्टूबर को रॉय को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इस दौरान जहां अरुंधति रॉय भाषण भी देंगी।
रॉय को पुरस्कार दिये जान को लेकर इंग्लिश पेन के अध्यक्ष रुथ बोर्थविक ने कहा, “रॉय बौद्धिक और सुंदर तरीके से अन्याय की महत्वपूर्ण कहानियां बयां करती हैं। वह वास्तव में एक अंतरराष्ट्रीय विचारक हैं और उनकी शक्तिशाली आवाज को दबाया नहीं जा सकता।” वहीं, खालिद अब्दुल्ला ने कहा, “अरुंधति रॉय स्वतंत्रता और न्याय की एक उज्ज्वल आवाज हैं, जिनके शब्द लगभग 30 वर्षों से अत्यंत स्पष्टता व दृढ़ संकल्प के साथ सामने आ रहे हैं।”
भारतीय लेखिका अरुंधति रॉय का जन्म 24 नवम्बर 1961 को शिलांग, मेघालय में हुआ था। लेखिका होने के साथ-साथ वे राजनीतिक कार्यकर्ता भी हैं। अपने उपन्यास द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स के लिये रॉय को बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। यह उनका पहला उपन्यास था। वे पर्यावरण और मानवाधिकारों के मुद्दों में उनकी भागीदारी के लिए जानी जाती हैं। इस कारण उन्हें विभिन्न कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ता रहा है। कश्मीरी स्वतंत्रता के समर्थन में टिप्पणी करने को लेकर 2010 में वे राजद्रोह के आरोपों से घिर गईं थीं। (एजेंसी इनपुट के साथ)