ईरानी तेल खरीदने पर America ने चीन को दी खुली चेतावनी, ट्रंप प्रशासन करेगा बड़ी कार्रवाई

Iran Oil Blockade: ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए America ने चीन को खुली चेतावनी दी है कि वह ईरानी तेल न खरीदे। अमेरिका अब सेकेंडरी पाबंदियां लगाने जा रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारी तनाव बढ़ेगा।
US Warns China Over Iran Oil Purchases Amid New Secondary Sanctions Threat
ट्रंप प्रशासन पाबंदियां (सोर्स-सोशल मीडिया)
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US Threatens China Over Oil: अमेरिका ने ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए नया कदम उठाया है। उसने चीन जैसे बड़े देशों को ईरानी तेल खरीदने पर सख्त चेतावनी दी है। ट्रंप प्रशासन अब व्यापार करने वाले देशों पर भी सेकेंडरी पाबंदियां लगाएगा। इस बड़े फैसले से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया और गहरा टकराव शुरू हो गया है।

चीन पर अमेरिकी चेतावनी

America ने अपनी नई रणनीति के तहत अब सीधे चीन को निशाने पर ले लिया है। चीन इस समय वैश्विक स्तर पर ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार माना जाता है। अगर चीन अपनी खरीद नहीं रोकता है, तो उसकी अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट आ सकता है।

मैक्सिमम प्रेशर पॉलिसी

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने चीन की इस तेल खरीद पर रोक लगाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के बैंकिंग सिस्टम में ईरान का पैसा नहीं दिखना चाहिए। ऐसा होने पर America अपनी मैक्सिमम प्रेशर पॉलिसी के तहत कड़ी कार्रवाई करेगा।

ऑयल नेटवर्क पर प्रतिबंध

America ने ईरान के तेल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर बहुत ही बड़ा प्रहार किया है। कई दर्जन कंपनियों और जहाजों पर अमेरिका ने नए सिरे से कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान की तेल सप्लाई चेन को तोड़कर उसकी आय पूरी तरह रोकना है।

समुद्री ब्लॉकेड का असर

हाल ही में अमेरिका ने समुद्र में ब्लॉकेड लागू करके ईरान की कमाई रोकी है। पहले दी गई तीस दिन की छूट के कारण 140 मिलियन बैरल तेल बाजार में पहुंचा था। अब America ने स्पष्ट कर दिया है कि यह छूट किसी को भी आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।

रूस के तेल पर सख्ती

अमेरिका का यह कड़ा कदम केवल ईरान तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। उसने रूस से जुड़े हुए तेल की खरीद पर मिलने वाली छूट भी अब खत्म कर दी है। इससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई कम होगी और कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आएगा।

भारत पर भी पड़ा प्रभाव

इस अमेरिकी फैसले का असर दुनिया के कई अन्य बड़े देशों पर भी तेजी से पड़ रहा है। भारत ने पूरे सात साल के लंबे समय बाद ईरानी एनर्जी की खरीद दोबारा शुरू की थी। अब नई पाबंदियों के कारण भारत को भी सस्ते तेल की खरीद में मुश्किल आ रही है।

ईरान की अर्थव्यवस्था पर चोट

ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से उसके तेल के भारी निर्यात पर निर्भर करती है। इस निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा चीन खरीदता है जिससे ईरान को बड़ा पैसा मिलता है। अमेरिका की यह खुली चेतावनी अब सीधे बीजिंग के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है।

चीन का शांत रवैया

इस अमेरिकी चेतावनी पर चीन ने अभी तक खुले तौर पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन अंदर ही अंदर दोनों बड़े देशों के बीच यह राजनीतिक टकराव काफी गहरा होता जा रहा है। यह स्थिति भविष्य में पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा कूटनीतिक संकट बन सकती है।

पाबंदियों से बचने के रास्ते

यह भी सच है कि ईरान हमेशा पाबंदियों के बावजूद तेल बेचने का नया रास्ता निकाल लेता है। वह अलग-अलग गुप्त रास्तों से अपना तेल हमेशा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाता रहा है। अब अमेरिका इन सभी गुप्त रास्तों को पूरी तरह से बंद करने की जोरदार कोशिश कर रहा है।

दोनों महाशक्तियों में तनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के लिए ईरानी तेल सस्ता और काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए चीन इतनी आसानी से अपनी तेल खरीद को पूरी तरह रोकने के लिए तैयार नहीं होगा। अगर अमेरिका सख्ती करता है तो दोनों महाशक्तियों के बीच बड़ा आर्थिक तनाव पैदा होगा।

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