

Aisha Wahab First Afghan American: अमेरिका के कैलिफोर्निया में डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रगतिशील नेता आयशा वहाब ने एक नया इतिहास रचा है। वह अमेरिकी संसद के लिए निर्वाचित होने वाली अफगान मूल की पहली महिला सदस्य बन गई हैं। उनका यह राजनीतिक सफर अनेक कठिन बाधाओं और कड़े व्यक्तिगत संघर्षों से भरा रहा है।
आयशा वहाब ने कैलिफोर्निया के 14वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट के विशेष चुनाव में अपनी मुख्य प्रतिद्वंद्वी मेलिसा हर्नांडेज को हराकर यह ऐतिहासिक जीत हासिल की। चुनाव परिणाम के अनुसार, वहाब को कुल मतों में से 53.09 प्रतिशत मत मिले, जबकि मध्यमार्गी डेमोक्रेट मेलिसा हर्नांडेज को 46.91 प्रतिशत मत प्राप्त हुए।
आयशा वहाब का जन्म साल 1987 में न्यूयॉर्क शहर में हुआ था। उनके माता-पिता सोवियत आक्रमण के समय अपनी जान बचाकर अफगानिस्तान से भागकर अमेरिका आए थे। उनके जन्म के कुछ समय बाद ही उनके पिता की बेरहमी से हत्या कर दी गई और उसके बाद मां की भी असमय मृत्यु हो गई थी।
इस पारिवारिक त्रासदी के बाद आयशा और उनकी बड़ी बहन फोस्टर केयर व्यवस्था में पली-बढ़ीं, जहां बच्चों की देखभाल गैर-जैविक परिवारों द्वारा की जाती है। जब आयशा करीब नौ साल की थीं, तब कैलिफोर्निया के फ्रेमोंट में रहने वाले एक दयालु अफगान-अमेरिकी दंपति ने इन दोनों बहनों को गोद लिया था।
वहाब ने साल 2018 में हेवर्ड नगर परिषद की सदस्य बनकर अपने राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत की थी। इसके साथ ही वह अमेरिका में किसी भी सार्वजनिक पद के लिए चुनी जाने वाली पहली अफगान-अमेरिकी महिला बनीं। इस सफलता के बाद उन्होंने निरंतर जनता के कल्याण के लिए कार्य किया।
साल 2022 में उन्होंने कैलिफोर्निया राज्य सीनेट के लिए चुनी जाने वाली पहली मुस्लिम महिला बनकर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। उनका यह ऐतिहासिक राजनीतिक सफर समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा करने और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए पूरी तरह समर्पित रहा है।
यह विशेष चुनाव डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता एरिक स्वालवेल द्वारा यौन दुराचार के गंभीर आरोपों के बाद अपनी सीट खाली करने के कारण हुआ था। इस सीट पर जीत के बाद आयशा वहाब एरिक स्वालवेल के शेष कार्यकाल यानी अगले साल 20 जनवरी तक संसद सदस्य के रूप में सेवा देंगी।
आगामी नवंबर में पूर्ण कार्यकाल के लिए होने वाले आम चुनाव में उनका मुकाबला एक बार फिर मेलिसा हर्नांडेज से होने की पूरी संभावना है। वहाब की इस शानदार जीत ने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया है कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कड़ी मेहनत से सफलता पाई जा सकती है।