ट्रंप के फैसले से हजारों अफगानियों की बढ़ी मुश्किलें! कुवैत में फंसे दाने-दाने को मोहताज हुए हजारों लोग

Afghan Refugees: अफगानिस्तान युद्ध में अमेरिका की मदद करने वाले हजारों लोग कुवैत में फंसे हैं। इन अफगान लोगों को ट्रंप प्रशासन ने शरण देने का वादा तोड़ दिया है और ट्रंप इन्हें कांगो भेजना चाहते हैं।
Afghan Refugees: Thousands Stranded in Kuwait As Trump Denies Entry to US Helpers
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अफगानी लोग (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Afghan Refugees Kuwait Camp: अफगानिस्तान में युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना का साथ देने वाले हजारों अफगानी अब दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो गए हैं। तालिबान से दुश्मनी मोल लेकर अमेरिका का साथ देने वाले इन लोगों से अमेरिका ने शरण देने का अपना वादा तोड़ दिया है। कुवैत के एक शेल्टर होम में महिलाओं और बच्चों समेत करीब 1100 लोग पिछले डेढ़ साल से बहुत ही बुरी स्थिति में रह रहे हैं। जिस अमेरिका के लिए उन्होंने अपनी जान दांव पर लगाई थी आज उसी ने बीच मंझधार में उनका साथ छोड़ दिया है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने शरणार्थियों के आवेदनों पर रोक लगाकर इन सभी अफगानी परिवारों के अमेरिका में बसने के सपने को चकनाचूर कर दिया है। कतर के अस-सयलियाह कैंप में ये लोग 700 महिलाओं और बच्चों के साथ रह रहे हैं जहां से इन्हें अमेरिका ले जाया जाना था। लेकिन अचानक फैसले बदलने से ये लोग वहीं फंस गए हैं और अब इन्हें हर वक्त ईरान के मिसाइल हमले का भी डर सता रहा है। इन मददगारों को जीपीएस ट्रैकर पहना दिए गए हैं और वे इस कैंप की तुलना पूरी तरह से एक कैदखाने और नरक से कर रहे हैं।

अफगानिस्तान के लोगों से वादा करके पलटा अमेरिका

अफगानिस्तान में अमेरिकी फौजें करीब 20 साल तक रही थीं और इस दौरान उन्होंने हजारों अफगानियों की खूब मदद ली थी। बदले में इन लोगों को अमेरिका में शरण देने का पक्का वादा किया गया था लेकिन अब सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। एक हैंगर में कंटेनरों के अंदर हजारों लोग बिना अलग टॉयलेट और रसोई के अपना जीवन बिताने को पूरी तरह से मजबूर हैं।

अमेरिका अब इन मजबूर मददगारों को अफ्रीकी देश कांगो भेजने की कोशिश कर रहा है जहां पहले से ही भयंकर गृहयुद्ध छिड़ा हुआ है। वहां पहले से ही 6 लाख से अधिक रिफ्यूजी रह रहे हैं और ये अफगानी परिवार एक जंग से निकलकर दूसरी जंग में नहीं जाना चाहते। ट्रंप प्रशासन इन अफगानियों से जल्द से जल्द पीछा छुड़ाना चाहता है और उन्हें कांगो भेजने का दबाव लगातार बना रहा है।

वफादारी की कीमत देकर जिम्मेदारियों से छुड़ा रहा पीछा

शरण का दावा छोड़ने के लिए मुख्य आवेदकों को 4500 डॉलर और परिवार के सदस्यों को 1200 डॉलर का ऑफर दिया जा रहा है। ट्रंप सरकार इन अफगानियों को वापस अफगानिस्तान लौटने के लिए यह मामूली वित्तीय सहायता देकर अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। लेकिन अफगानी परिवार इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं और अमेरिकी सरकार की इन नीतियों से उनका भविष्य पूरी तरह अंधकार में है।

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