

नवभारत इंटरनेशनल डेस्क: युगांडा में एक बार फिर इबोला वायरस का खतरा बढ़ गया है। देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को पुष्टि की कि राजधानी कंपाला में एक नर्स की इबोला संक्रमण से मौत हो गई है। यह साल 2023 के बाद पहली बार है जब इबोला से किसी की जान गई है। मंत्रालय ने इस स्थिति से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठनों से सहायता की अपील की है।
अब तक कुल 44 लोग इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं, जिनमें 30 स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं।
युगांडा की राजधानी कंपाला में इबोला वायरस से पहली मौत दर्ज की गई है। मुलागो नेशनल रेफरल अस्पताल में 32 वर्षीय मरीज की 29 जनवरी को मृत्यु हो गई, जहां पोस्टमार्टम के दौरान 'सूडान इबोला वायरस' की पुष्टि हुई। संक्रमण के कारण मरीज के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। इसके अलावा, 30 स्वास्थ्यकर्मियों को भी संभावित रूप से संक्रमित माना जा रहा है।
इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने संभावित मरीजों की पहचान कर टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है। युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र (UN) से आपातकालीन सहायता मांगी है, साथ ही केन्या, तंजानिया और रवांडा के अस्पतालों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
यदि कोई व्यक्ति इबोला वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो उसके शरीर में कई गंभीर लक्षण उभर सकते हैं। ये लक्षण निम्नलिखित हैं:
- अचानक तेज बुखार आना
- तेज सिरदर्द होना
- उल्टी और दस्त की समस्या
- आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव होना
- अंगों का काम करना बंद कर देना (ऑर्गन फेल्योर)
युगांडा में इबोला के प्रसार को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण उपाय किए जा रहे हैं। संभावित संक्रमितों को अलग-थलग (क्वारंटीन) किया जा रहा है, और टीकाकरण अभियान भी शुरू किया गया है। सरकार ने नागरिकों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध मामले की सूचना देने की अपील की है।
युगांडा की राजधानी कंपाला अत्यधिक भीड़भाड़ वाला क्षेत्र है और इसका सीधा संपर्क दक्षिण सूडान, कांगो, रवांडा सहित कई अन्य देशों से है। यदि इबोला वायरस यहां फैलता है, तो यह तेजी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल सकता है, जिससे एक गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता है। इससे पहले, 2014-16 के दौरान पश्चिम अफ्रीका में इसी तरह की स्थिति देखी गई थी।