

West Bengal Madrasa Action Suvendu Government: उत्तर प्रदेश की तर्ज पर अब पश्चिम बंगाल में भी मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है। योगी आदित्यनाथ की तरह ही सुवेंदु अधिकारी भी अब अपने राज्य में 'बुलडोजर एक्शन' शुरू करना चाहते हैं। अल्पसंख्यक समूहों का आरोप है कि सरकार खास तौर पर मुसलमानों को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, गैर-कानूनी या निजी तौर पर चलाए जा रहे मदरसों की फंडिंग, पाठ्यक्रम, शिक्षकों की योग्यता और रोजमर्रा के कामकाज की जांच की जाएगी। अगर कोई गड़बड़ी पाई गई तो उसे बंद कराने का आदेश जारी किया जाएगा। अगर किसी जमीन पर अवैध तरीके से मदरसा बनाया गया होगा, तो उसे ढहाने का भी आदेश दिया जाएगा।
राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले की टीएमसी सरकार ने कभी किसी मदरसों के बारे में जानकारी नहीं मांगी। यह एक संवेदनशील मामला है इसलिए इस मामले में ज्यादा जानकारी नहीं दी जा सकती है। अगर किसी मदरसे में गड़बड़ी या फिर विदेशी फंडिंग का मामला सामने आया तो उसे तुरंत बंद कर दिया जाएगा।
बंगाल सरकार ने 5 जून को ही डीएम को ऐसे मदरसों की लिस्ट सौंप दी है और पांच जुलाई तक रिपोर्ट देने को कहा है। रिपोर्ट मिलते ही सुवेंदु सरकार मदरसों के खिलाफ एक्शन लेना शुरू कर देगी। मदरसों की फडिंग की जानकारी इक्ट्ठा करने के लिए एसआईटी का गठन किया जा सकता है। बंगाल में ऐसे करीब 8000 मदरसे है, जिन पर अब बुलडोजर एक्शन की तलवार लटकी हुई है।
2014 के खगरागढ़ ब्लास्ट के बाद, एनआईए ने कहा कि जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश जैसे संगठन खारीजी मदरसों के भीतर सक्रिय थे। एजेंसी ने नोट किया कि इन मदरसों में बच्चों को कट्टरपंथी बनाया जा रहा था।
साथ ही, 601 ऐसे मदरसे हैं जिन्हें कोई सरकारी फंडिंग नहीं मिलती है फिर भी वे सरकार द्वारा अनुमोदित पाठ्यक्रम का पालन करते हैं; लोकल लीडर उनके लिए फंडिंग दे सकते हैं। वेस्ट बंगाल बोर्ड के तहत सरकारी मदद वाले और रजिस्टर्ड बिना मदद वाले मदरसे भी चलते हैं, जिनके साथ अरबी और थियोलॉजी की अलग से पढ़ाई होती है।