अमित शाह का चुनावी वादा पूरा! बंगाल विधानसभा में आज पेश होगा UCC विधेयक, चर्चा के लिए मिलेगा सिर्फ 1 घंटा

West Bengal UCC Bill Assembly: पश्चिम बंगाल विधानसभा में सरकार आज यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पेश करेगी। उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद पश्चिम बंगाल ऐसा करने वाला चौथा राज्य बन जाएगा।
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सीएम सुवेंदु अधिकारी (सौजन्य-IANS)
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CM Suvendu Adhikari UCC Debate: पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) से संबंधित विधेयक सोमवार यानी आज राज्य विधानसभा में पेश किया जाएगा। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों को एक एकीकृत नागरिक कानून से बदलने वाला चौथा भारतीय राज्य बन जाएगा, जो धर्म, जाति या जनजाति की परवाह किए बिना सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा।

इससे पहले तीन राज्य UCC को अपना चुके है। इनमें उत्तराखंड, गुजरात और असम राज्य शामिल हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विधेयक पेश करने का फैसला गुरुवार शाम लिया गया था।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी चर्चा में लेंगे हिस्सा

अध्यक्ष रथेंद्र बोस द्वारा विधानसभा परिसर में बैठक बुलाई गई थी, जिसमें UCC विधेयक पेश करने का फैसला लिया गया। बैठक कुछ देर तक चली। सोमवार को सदन में कुल पांच विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें से एक और संभवतः सबसे महत्वपूर्ण UCC विधेयक है।

मिली जानकारी के अनुसार, बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि विधेयकों पर चर्चा के लिए कुल एक घंटे का समय आवंटित किया जाएगा। इस चर्चा में खुद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी चर्चा में भाग लेंगे।

पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के भी चर्चा में शामिल होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले आयोजित चुनावी रैलियों में किए गए वादे के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में असामाजिक नियंत्रण अधिनियम (UCC) को लागू करने की प्रतिबद्धता जताई थी।

UCC के साथ एक अन्य महत्वपूर्ण विधेयक है, जिसे सोमवार को विधानसभा में पेश किया जाएगा। इसका नाम है 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक, 2026', जिसका उद्देश्य राज्य में असामाजिक गतिविधियों से निपटना है।

प्रस्तावित विधेयक भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के प्रावधानों से दो मुख्य मामलों में भिन्न है।

  • पहला, यदि किसी व्यक्ति को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है, तो विधेयक के लागू होने के बाद, उसे एक वर्ष तक निवारक हिरासत में रखा जा सकेगा।
  • दूसरा, यह विधेयक राज्य सरकार को बीएनएस के संबंधित प्रावधानों का उपयोग करके ऐसे अपराधों में शामिल व्यक्ति की संपत्ति जब्त करने का अधिकार देता है।
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