

TMC Parliamentary Party Crisis: पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी में चल रहे अंदरूनी कलह की आंच अब राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखने लगी है। बुधवार को पार्टी को अपने 28 साल के इतिहास में सबसे बड़ी फूट का सामना करना पड़ा। पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी ने 58 विधायकों के साथ विधानसभा में विधायक दल पर कब्जा जमा लिया। बागी विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में अपना नेता चुन लिया। विधानसभा अध्यक्ष ने भी इसकी मान्यता दे दी।
विधानसभा के बाद अब संसदीय दल में भी टूट की संभावना बढ़ा गई है। इस घटना के बाद बागी नेताओं ने स्पष्ट कहा है कि उनकी लड़ाई ममता बनर्जी से नहीं, बल्कि उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ है।
सूत्रों के मुताबिक बागी गुट विधानसभा में अपनी पकड़ मजबूत करने के बाद TMC सांसदों को अपने पाले में करने की तैयारी हैं। वे लगातार ज्यादा सांसदों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। लोिकसभा में वर्तमान में TMC के 29 सांसद हैं। पार्टी की तरफ से अभिषेक बनर्जी संसदीय दल के नेता बनाया गया है। ऐसे में अगर बड़ी संख्या में TMC सांसद, बागी नेताओं के पाले में आते हैं तो संसदीय नेतृत्व में भी बदलाव होगा और अभिषेक बनर्जी की कुर्सी भी जा सकती है।
टीएमसी पार्टी के संसदीय दल में टूट होने पर यह ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगी। इस समय अभिषेक लोकसभा में पार्टी के संसदीय दल के नेता हैं। ऐसे में ज्यादातर सांसदों के बागी गुट के साथ चले जाने पर अभिषेक की राष्ट्रीय राजनीति प्रभावित होगी। साथ ही मुख्य विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक में TMC की भूमिका पर प्रश्नचिंह लग सकता है।
हालांकि, अब देखना यह है कि ये बागी गुट विधानसभा के जैसे संसद में भी अपनी सफलता दोहरा पाते हैं या नहीं, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो विधानसभा के साथ-साथ संसद और पार्टी के नेतृत्व पर भी ममता बनर्जी के लिए गंभीर चुनौती खड़ी हो जाएगी।