कहां छिपे हैं मोजतबा खामेनेई? 150 दिनों से नहीं मिल रहा है कोई सुराग, मोसाद और CIA का बढ़ा सिरदर्द

Mojtaba Khamenei Missing: अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा खामेनेई का पता नहीं चल रहा हैं। 150 दिनों से डिजिटल साये से दूर मोजतबा की तलाश अब ह्यूमन इंटेलिजेंस' के जरिए की जा रही है।
Where is Mojtaba Khamenei hiding? No trace found for 150 days; a growing headache for Mossad and the CIA!
मोजतबा खामेनेई की तलाश में मोसाद-CIA, AI Photo
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Iran Supreme Leader Mojtaba Khamenei Missing: ईरान में सत्ता के शीर्ष पर बैठे नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को लेकर रहस्य गहराता जा रहा है। बीती 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए भीषण हवाई हमले में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद से ही मोजतबा सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह गायब हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले करीब 150 दिनों से उनका कोई सुराग नहीं मिला है, जिसके बाद उनके जीवित होने पर भी सवाल उठने लगे हैं।

मोसाद की बढ़ी बेचैनी

द टाइम्स ऑफ लंदन की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए इजरायली मीडिया ने दावा किया है कि मोजतबा खामेनेई पिछले पांच महीनों से किसी भी डिजिटल उपकरण का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। उन्होंने फोन, लैपटॉप, रेडियो या ऐसी किसी भी तकनीक से दूरी बना ली है जो डिजिटल सिग्नल उत्सर्जित करती हो।

माना जा रहा है कि अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियां CIA और मोसाद उनकी लोकेशन ट्रेस करने के लिए दिन-रात एक कर रही हैं, लेकिन मोजतबा ने खुद को पूरी तरह ऑफ-ग्रिड कर लिया है।

पहचान उजागर होने का डर

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, जिस एयरस्ट्राइक में उनके पिता की जान गई थी, उसमें मोजतबा भी गंभीर रूप से घायल हुए थे। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उस हमले में उनका चेहरा बुरी तरह खराब हो गया है। उन्हें डर है कि यदि वे बाहर निकलते हैं तो अमेरिकी जासूसी सैटेलाइट्स की आधुनिक फेशियल रिकग्निशन तकनीक उन्हें तुरंत पहचान लेगी। इसी वजह से वह किसी अज्ञात अंडरग्राउंड ठिकाने में शरण लिए हुए हैं।

हर तकनीक नाकाम हो  रही

अयातुल्लाह खामेनेई का पता लगाने के लिए अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी (NSA) और इजरायल की यूनिट 8200 ने तेहरान के ट्रैफिक कैमरों तक को हैक कर लिया था। इस डिजिटल जाल के जरिए ही खामेनेई और उनके करीबियों की सटीक लोकेशन मिली थी।

हालांकि, मोजतबा के मामले में ये तकनीकें नाकाम साबित हो रही हैं। अब खुफिया एजेंसियां ह्यूमन इंटेलिजेंस यानी मैदानी जासूसों पर निर्भर हैं। यह सूचना जुटाने का एक पुराना और जोखिम भरा तरीका है, जिसमें जान का खतरा हमेशा बना रहता है।

क्या यह IRGC की कोई बड़ी चाल है?

इंटेलिजेंस कम्युनिटी के भीतर एक बड़ा वर्ग यह भी मानता है कि मोजतबा खामेनेई की शायद पहले ही मौत हो चुकी है। यह आशंका जताई जा रही है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) केवल उनके जीवित होने का नाटक कर रही है ताकि देश के भीतर विद्रोह को रोका जा सके और अमेरिका के खिलाफ मनोवैज्ञानिक युद्ध को जारी रखा जा सके।

फिलहाल, वाशिंगटन और येरुशलम के सुरक्षा प्रमुखों के लिए यह केवल एक ऑपरेशनल चुनौती नहीं, बल्कि एक बड़ी रणनीतिक पहेली बन गई है।

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