सुप्रीम कोर्ट ने मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में NIA से मांगी रिपोर्ट, कलकत्ता हाई कोर्ट को सौंपी आगे की कमान
Murshidabad Violence Case : सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट इस मामले में एनआईए जांच का आदेश देने के केंद्र के फैसले को राज्य सरकार की चुनौती की जांच कर सकता है।
- Written By: रंजन कुमार
सुप्रीम कोर्ट (इमेज-सोशल मीडिया)
Supreme Court News : पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बार-बार हो रही हिंसा और अशांति के मामले में अब देश की शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में आतंकी गतिविधियों से जुड़े ‘गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम’ (UAPA) के प्रावधानों को लागू करने के औचित्य पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करे। यह रिपोर्ट कलकत्ता हाई कोर्ट में एक सीलबंद लिफाफे में दाखिल की जाएगी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दायर की गई अपील का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया। बेंच ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अपनी शिकायतों और NIA जांच के खिलाफ आपत्तियों को लेकर वापस कलकत्ता हाई कोर्ट जा सकती है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट इस बात की जांच करने के लिए स्वतंत्र है कि केंद्र सरकार का इस मामले में NIA जांच का आदेश देना कितना उचित था।
क्या था पूरा विवाद?
मामले की जड़ें जनवरी के मध्य में हुई हिंसा से जुड़ी हैं। दरअसल, 16 जनवरी को झारखंड में मुर्शिदाबाद के एक प्रवासी मजदूर की कथित मौत के बाद बेलडांगा में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था, जिसके कारण नेशनल हाईवे 12 करीब छह घंटे तक जाम रहा। इसके अगले ही दिन बिहार में एक अन्य मजदूर के साथ बदसलूकी की खबर आने के बाद फिर से सड़क और रेल मार्ग बाधित किए गए। इन घटनाओं ने जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ दी थी।
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हाई कोर्ट का रुख और केंद्र का दखल
इन घटनाओं को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग की गई थी। 20 जनवरी को हाई कोर्ट ने अशांति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन को शांति बहाली के निर्देश दिए थे। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 28 जनवरी को इस मामले की जांच NIA को सौंप दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट के इस नए निर्देश के बाद सारा ध्यान कलकत्ता हाई कोर्ट पर टिक गया है। हाई कोर्ट को अब यह तय करना है कि क्या मुर्शिदाबाद की घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा थीं या इनमें वास्तव में ऐसी कोई साजिश थी, जो UAPA जैसे कड़े कानून के दायरे में आती है।
