बंगाल में 25 साल बाद लौटा खौफनाक 'निपाह', 75% तक डेथ रेट और कोई इलाज नहीं! केंद्र ने भेजी टीम

Nipah Virus in bengal: पश्चिम बंगाल में 25 साल बाद निपाह वायरस की वापसी हुई है। एम्स कल्याणी में दो नर्सों में संक्रमण की पुष्टि के बाद केंद्र ने विशेषज्ञों की हाई-लेवल टीम तैनात की है।
nipaah virus in west bengal: बंगाल में 25 साल बाद लौटा खौफनाक 'निपाह': 75% डेथ रेट और कोई इलाज नहीं; केंद्र ने भेजी विशेष टीम
प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
Published on
Updated on

Nipah Virus West Bengal: पश्चिम बंगाल में जानलेवा निपाह वायरस ने साल 2001 के बाद एक बार फिर दस्तक दी है। एम्स कल्याणी में दो संदिग्ध मामले सामने आने के बाद केंद्र सरकार पूरी तरह अलर्ट पर है। उच्च मृत्यु दर और टीके के अभाव को देखते हुए राज्य के कई जिलों में आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिए गए हैं।

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर निपाह वायरस (NiV) का साया गहराने लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य में 2001 के बाद यह पहला मौका है जब इस जानलेवा वायरस के संदिग्ध मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने जानकारी दी है कि 11 जनवरी 2026 को एम्स (AIIMS) कल्याणी में संक्रमण की पुष्टि हुई, जिसके बाद से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

25 साल बाद फिर निपाह की आहट: एम्स कल्याणी में पुष्टि

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर निपाह वायरस (NiV) का साया गहराने लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य में 2001 के बाद यह पहला मौका है जब निपाह के संदिग्ध मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने जानकारी दी है कि 11 जनवरी, 2026 को एम्स (AIIMS) कल्याणी में वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई, जिसके बाद से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। वर्ष 2001 में जब सिलीगुड़ी में इसका प्रकोप हुआ था, तब 66 में से 45 लोगों की मौत हो गई थी।

दो नर्सें संक्रमित, तीन जिलों में हाई अलर्ट

राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुष्टि की कि संक्रमण की चपेट में आई दोनों संदिग्ध महिलाएं पेशे से नर्स हैं। ये दोनों उसी अस्पताल में कार्यरत थीं जहाँ वर्तमान में उनका उपचार चल रहा है। जांच में सामने आया है कि ये नर्सें हाल ही में बर्धमान गई थीं, जिसके बाद प्रशासन ने उन क्षेत्रों में भी जांच तेज कर दी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उत्तर 24 परगना, पूर्व बर्धमान और नदिया जिलों में युद्ध स्तर पर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी गई है। राज्य सरकार ने आम जनता की सहायता के लिए तीन आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय किए हैं ताकि किसी भी संदिग्ध लक्षण की सूचना तुरंत दी जा सके।

केंद्र की हाई-लेवल रिस्पॉन्स टीम तैनात

मामले की जूनोटिक प्रकृति और उच्च खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक मल्टी-डिसिप्लिनरी नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम को बंगाल भेजा है। इस टीम में निम्नलिखित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं:

  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV)
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (NIE)
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का वन्यजीव प्रभाग

यह टीम स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर संक्रमण के स्रोत का पता लगाएगी और विशेष संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण प्रोटोकॉल सुनिश्चित करेगी।

Nipah Virus West Bengal 2026

कितना जानलेवा है यह वायरस?

निपाह वायरस एक बेहद खतरनाक जूनोटिक संक्रमण है, जो मुख्य रूप से फ्लाइंग फॉक्स (फल खाने वाले चमगादड़) के जरिए फैलता है। इसके अलावा, यह सूअरों और अन्य पालतू जानवरों से इंसानों में, और फिर इंसानों से इंसानों में फैल सकता है।

इसकी भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक होती है। यह वायरस सीधे मस्तिष्क पर हमला करता है, जिससे एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन) हो सकती है। चिकित्सा जगत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि वर्तमान में इस वायरस के लिए कोई विशेष दवा या टीका उपलब्ध नहीं है।

बचाव के उपाय और लक्षण

विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षण सामान्य होने के कारण इसे पहचानना कठिन होता है, लेकिन न्यूरोलॉजिकल सिम्प्टम्स (Neurological symptoms) दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है। बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय अनिवार्य हैं:

  • संक्रमित क्षेत्रों या बीमार जानवरों से दूर रहें।
  • सतहों का कीटाणुशोधन और सुरक्षात्मक उपकरणों (PPE) का उपयोग करें।
  • चमगादड़ द्वारा खाए गए या जमीन पर गिरे फलों का सेवन न करें।
Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com