

TMC Mamata Faction Protest in Kolkata: पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर अगले महीने उपचुनाव होने वाले हैं। इससे पहले राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। रविवार को कोलकाता में ममता बनर्जी के टीएमसी गुट के नेताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के कार्यकर्ताओं ने पार्टी के एक कार्यालय पर कब्जा कर लिया है।
विरोध मार्च में मीडिया से बात करते हुए ममता गुट के नेता वसुंधरा गोस्वामी ने दावा किया कि ममता गुट के पार्षदों, पार्टी सदस्यों और उनके घरों पर हमले किए गए। पार्टी ने चुनाव के बाद हुई हिंसा की घटनाओं को लेकर पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। टीएमसी कार्यकर्ताओं की पिटाई की गई।
टीएमसी (ममता) गुट के नेता बैसवानोर चट्टोपाध्याय ने मीडिया को बताया कि पार्टी अपने पार्षदों और नेताओं पर हुए हमले के विरोध में प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। चट्टोपाध्याय ने कहा कि हमारे पार्षदों पर हमला हुआ। हम मांग करते हैं कि दोषियों को गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
एक अन्य नेता मलय मजूमदार ने दावा किया कि पार्टी सदस्यों के घरों को भी निशाना बनाया गया और एक पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने कहा हमारे कि पार्टी कार्यालय पर हमला हुआ, हमारे घरों पर भी हमला किया गया। हम इन हमलों के विरोध में आज शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शन कर रहे हैं।
नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर अगले महीने उपचुनाव होने वाले हैं। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्टूबर को वोटों की गिनती होना निर्धारित है। 2026 के विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भबानीपुर सीट को बरकरार रखते हुए नंदीग्राम सीट को खाली किया है। अधिकारी ने विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराया था।
इसके अलावा आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर ने रेजिनगर विधानसभा सीट से इस्तीफा दिया था। इसके चलते यह सीट खाली हुई है। हुमायूं कबीर ने रेजिनगर और नौदा से चुनाव लड़ा था और दोनों जगह जीत हासिल की थी।
ममता बनर्जी ने उपचुनाव में नंदीग्राम सीट के लिए उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन किया है। उन्होंने यह फैसला तब किया जब उनकी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने आखिरी समय में उपचुनाव से अपना नाम वापस ले लिया था। इसके बाद बनर्जी ने कांग्रेस को अपनी सहयोगी पार्टी बताते हुए समर्थन का ऐलान किया। हालांकि उनसे समर्थन के कुछ घंटों बाद ही कांग्रेस उम्मीदवार को पुलिस ने 19 साल पुराना मामले में गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
ममता बनर्जी इस समय तीन-तरफा लड़ाई लड़ रही हैं। पहली लड़ाई वह भाजपा सरकार से लड़ रही है, दूसरी लड़ाई टीएमसी के गुट से, और तीसरी चुनाव आयोग से। चुनाव आयोग ने हाल ही में पार्टी के अंदर चल रहे नेतृत्व विवाद के बीच, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को फ्रीज करने का फैसला सुनाया। ममता ने चुनाव आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।