...तो देश में रहने का अधिकार नहीं, वंदे मातरम के विरोध पर मौलाना मदनी पर भड़कीं मंत्री अग्निमित्रा पॉल

Bengal Schools Vande Mataram Row: पश्चिम बंगाल सरकार के वंदे मातरम, समेत कई फैसलों पर जमीयत उलेमा ए हिंद के मौलाना ने विरोध किया था। इस पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
"...Then you have no right to live in this country"—Minister Agnimitra Paul lashes out at Maulana Madani over opposition to 'Vande Mataram'.
अग्निमित्रा पॉल और मौलाना मदनी (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Agnimitra Paul Dilip Ghosh Statement: पश्चिम बंगाल के स्कूलों में वंदे मातरम अनिवार्य किए जाने समेत सरकार के अन्य कई फैसलों का पर जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने विरोध करते हुए अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया था। इसपर बीजेपी ने पलटवार किया है। बंगाल सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने जवाब देते हुए कहा, अगर किसी को भारत मां की संतान होने में परेशानी है तो किसी और देश में रह सकता है।

मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बंगाल सरकार द्वारा स्कूलों में वंदे मातरम अनिवार्य किए जाने के निर्णय का समर्थन किया और कहा, हम सब भारत के संतान हैं, सभी धर्म के लोग भारत मां की संतान हैं। जो नहीं मानते, कि भारत उनकी मां है, उनको देश में रहने का अधिकार नहीं है।

बीजेपी ने किया समर्थन

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा स्कूलों की सुबह की सभाओं में वंदे मातरम अनिवार्य किए जाने पर मंत्री दिलीप घोष ने समर्थन किया। उन्होंने कहा, वंदे मातरम पश्चिम बंगाल में इतना शक्तिशाली आह्वान था कि लाखों लोग सड़कों पर उतरे, स्वतंत्रता संग्राम में गोलियों का सामना किया, जेल गए। यह गीत बंकिम चंद्र द्वारा लिखा गया था, फिर भी इसे बंगाल में गाने की अनुमति नहीं थी।

आगे उन्होंने कहा, हमने यह कर दिखाया है और आज से यह हर स्कूल में गाया जाएगा। इसे सरकारी कार्यक्रमों में भी अनिवार्य कर दिया गया है और वहां भी गाया जाएगा। यह पहले से ही हमारी पार्टी के सभी कार्यक्रमों, बैठकों और सभाओं में गाया जाता है। अब इसे सरकारी स्कूलों में भी गाया जाएगा, जिससे कि बच्चे इससे प्रेरणा ले सकें और देशभक्ति सीख सकें।

बंगाल सरकार पर निशाना

मौलाना अरशद मदनी ने पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा, राज्य के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री का यह बयान कि वे सिर्फ हिंदुओं के लिए काम करेंगे संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के पूरी तरह विरुद्ध है, क्योंकि हर मुख्यमंत्री शपथ लेकर सभी नागरिकों के साथ न्याय करने का संकल्प लेता है। सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी हर नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है, न कि किसी विशेष वर्ग के खिलाफ नफरत और विभाजन की राजनीति करना।

वैचारिक राष्ट्र बनाने की कोशिश: मदनी

मदनी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए लिखा, देश को योजनाबद्ध तरीके से एक वैचारिक राष्ट्र में बदलने की कोशिश की जा रही है। समान नागरिक संहिता, वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाना, मस्जिदों और मदरसों के खिलाफ कार्रवाइयां तथा एसआईआर की आड़ में वास्तविक नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने जैसे कदम इसी सिलसिले की कड़ियां हैं। जमीयत उलमा-ए-हिंद इन सभी कदमों के खिलाफ अपनी कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रखेगी।

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