

Abhishek Banerjee Statement: तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ चल रही जांच और पार्टी के भीतर उठ रही आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है और वह उनके विचारों का सम्मान करते हैं। अभिषेक बनर्जी ने कहा, जो वरिष्ठ नेता मेरे खिलाफ बोल रहे हैं, उन्हें पार्टी के भीतर अपनी बात रखने का पूरा हक है। कल्याण बनर्जी ने मेरे बारे में जो कहा, वह उनका अधिकार है। वह मुझे बचपन से जानते हैं और उन्होंने हमेशा मेरा मार्गदर्शन किया है।
भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अब सरकार बदल चुकी है और उन्हें किसी भी मामले में फंसाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, अभिषेक बनर्जी ने स्पष्ट किया कि वे दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, अब सरकार बदल गई है। वे मुझे हर संभव मामले में जोड़ने की कोशिश करेंगे, लेकिन हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे। अभिषेक बनर्जी ने 2011 और 2026 की परिस्थितियों की तुलना करते हुए दावा किया कि राज्य का माहौल पूरी तरह बदल चुका है। 2011 और 2026 के बीच का अंतर देखिए। रात 8 बजे के बाद सड़कें सुनसान हो रही हैं और भाजपा अपनी जीत के जुलूस तक नहीं निकाल पा रही है।
उन्होंने भाजपा पर चुनाव से पहले किए गए वादों से पीछे हटने का आरोप भी लगाया। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि चुनाव से पहले भाजपा 'अन्नपूर्णा भंडार योजना' की बात कर रही थी, लेकिन चुनाव के बाद राज्य में 'बुलडोजर राजनीति' देखने को मिल रही है। जांच एजेंसियों के समन को लेकर अभिषेक बनर्जी ने कहा कि उन्होंने हमेशा जांच में सहयोग किया है और आगे भी करते रहेंगे। टीएमसी महासचिव ने बताया कि उन्होंने करीब साढ़े पांच घंटे तक अधिकारियों के साथ सहयोग किया और अदालत द्वारा तय समय से पहले ही भवानी भवन पहुंच गए थे।
अभिषेक बनर्जी ने कहा, मैं 14 जून को कोलकाता में रहूंगा और जरूरत पड़ने पर फिर उपस्थित होऊंगा। मैंने कभी किसी जांच से बचने की कोशिश नहीं की। चाहे केंद्रीय जांच एजेंसी हो या राज्य की जांच एजेंसी, मैं हमेशा सहयोग करता रहूंगा। उन्होंने समन जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उन्हें फोन पर बुलाया जाता तो वे घर पर ही रुक जाते। पहला समन 30 तारीख को जारी हुआ था, लेकिन उसी दिन उन पर हमला हुआ था। इसके बाद वे दिल्ली चले गए।
फिर 8 तारीख को नोटिस मिला, जिसमें 9 तारीख को पेश होने को कहा गया, लेकिन उस समय भी वे दिल्ली में थे। कोलकाता लौटने के बाद उन्हें हाईकोर्ट के निर्देश की जानकारी मिली और वे तय समय तक जांच एजेंसी के सामने उपस्थित हुए।
अपने चुनावी बयान को लेकर दर्ज मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया कि जब उन्होंने वह टिप्पणी की थी, तब चुनाव चल रहे थे और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के पास थी। उन्होंने कहा कि यदि उनके बयान के आधार पर मामला दर्ज किया जा सकता है, तो उसी दौरान दिए गए बयानों के लिए केंद्रीय गृह मंत्री को भी पूछताछ के लिए क्यों नहीं बुलाया जाना चाहिए?
एजेंसी इनपुट के साथ...