आज से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ की शुरुआत हो गई। कुंभ को दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक मेला के रूप में जाना जाता है। इस बार का कुंभ काफी खास है, जो कि 144 सालों के यह बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है। हिंदू किंवदंतियों का कहना है कि भगवान विष्णु ने मोहिनी का वेश धारण किया और राक्षसों से बचाने के लिए समुद्र मंथन के बाद अमृत का कलश ले लिया। एक युद्ध छिड़ गया, जिसके कारण अमृत की बूंदें चार स्थानों – प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में गिरीं। इन स्थानों में चार तीर्थ या पवित्र स्थल हैं और इनसे होकर बहने वाली नदियों – उज्जैन में क्षिप्रा नदी, नासिक की गोदावरी, हरिद्वार में गंगा और प्रयागराज में संगम में डुबकी लगाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रयागराज में गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों जहां मिलान होता है उसे संगम कहा गया है। देखिए महाकुंभ मेले के पीछे की कहानी का एक्सपेनर वीडियाे…
आज से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ की शुरुआत हो गई। कुंभ को दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक मेला के रूप में जाना जाता है। इस बार का कुंभ काफी खास है, जो कि 144 सालों के यह बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है। हिंदू किंवदंतियों का कहना है कि भगवान विष्णु ने मोहिनी का वेश धारण किया और राक्षसों से बचाने के लिए समुद्र मंथन के बाद अमृत का कलश ले लिया। एक युद्ध छिड़ गया, जिसके कारण अमृत की बूंदें चार स्थानों – प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में गिरीं। इन स्थानों में चार तीर्थ या पवित्र स्थल हैं और इनसे होकर बहने वाली नदियों – उज्जैन में क्षिप्रा नदी, नासिक की गोदावरी, हरिद्वार में गंगा और प्रयागराज में संगम में डुबकी लगाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रयागराज में गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों जहां मिलान होता है उसे संगम कहा गया है। देखिए महाकुंभ मेले के पीछे की कहानी का एक्सपेनर वीडियाे…