Exit Poll: सच या महज अंदाजा? जानें 2004 में कैसे फेल हुए थे सारे सर्वे और क्या है इसका इतिहास, देखें VIDEO
Exit Poll Analysis Video: एग्जिट पोल चुनावी नतीजों के पूर्वानुमान का एक सशक्त माध्यम है, जिसे वोट देकर बाहर निकलने वाले मतदाताओं की राय के आधार पर तैयार किया जाता है।
- Written By: अमन मौर्या
Exit Poll Analysis: एग्जिट पोल चुनावी नतीजों के पूर्वानुमान का एक सशक्त माध्यम है, जिसे वोट देकर बाहर निकलने वाले मतदाताओं की राय के आधार पर तैयार किया जाता है। भारत में इसकी शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी, लेकिन 1996 में दूरदर्शन और CSDS के सर्वे के बाद यह बेहद लोकप्रिय हुआ। एग्जिट पोल की सटीकता सैंपल साइज, निष्पक्ष सवालों और सर्वे की भौगोलिक सीमा पर निर्भर करती है। कानूनन, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत मतदान समाप्त होने के आधे घंटे बाद ही इन्हें प्रसारित किया जा सकता है, उससे पहले करना दंडनीय अपराध है। इतिहास गवाह है कि जहाँ 1996 में ये पोल सटीक रहे, वहीं 2004 के चुनावों में सभी सर्वे एजेंसियां पूरी तरह विफल साबित हुई थीं। वर्तमान में लगभग 15 निजी एजेंसियां मीडिया घरानों के साथ मिलकर इनका विश्लेषण करती हैं, जो चुनावी उत्सुकता को और बढ़ा देती हैं।
Exit Poll Analysis: एग्जिट पोल चुनावी नतीजों के पूर्वानुमान का एक सशक्त माध्यम है, जिसे वोट देकर बाहर निकलने वाले मतदाताओं की राय के आधार पर तैयार किया जाता है। भारत में इसकी शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी, लेकिन 1996 में दूरदर्शन और CSDS के सर्वे के बाद यह बेहद लोकप्रिय हुआ। एग्जिट पोल की सटीकता सैंपल साइज, निष्पक्ष सवालों और सर्वे की भौगोलिक सीमा पर निर्भर करती है। कानूनन, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत मतदान समाप्त होने के आधे घंटे बाद ही इन्हें प्रसारित किया जा सकता है, उससे पहले करना दंडनीय अपराध है। इतिहास गवाह है कि जहाँ 1996 में ये पोल सटीक रहे, वहीं 2004 के चुनावों में सभी सर्वे एजेंसियां पूरी तरह विफल साबित हुई थीं। वर्तमान में लगभग 15 निजी एजेंसियां मीडिया घरानों के साथ मिलकर इनका विश्लेषण करती हैं, जो चुनावी उत्सुकता को और बढ़ा देती हैं।
