West Bengal Assembly Elections 2026: अगले महीने पश्चिम बंगाल सहित देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, लेकिन बंगाल की चुनावी लड़ाई ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह चुनाव महज सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि ममता बनर्जी और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच एक बड़ी राजनीतिक प्रतिष्ठा की जंग बन चुका है। बंगाल के चुनाव को खास बनाने वाले पांच प्रमुख कारणों में सबसे ऊपर ‘चुनावी हिंसा’ है, जो यहाँ की राजनीति का एक काला हिस्सा रही है। दूसरा कारण ‘स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग रिवीजन’ (SIR) को लेकर उपजा विवाद है, जिसने मतदाता सूचियों और नागरिक पहचान के मुद्दे को भावनात्मक बना दिया है। तीसरा महत्वपूर्ण पहलू ममता बनर्जी का व्यक्तिगत कद है, जो उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा बनाता है। चौथा कारण भाजपा के लिए बंगाल को अपना ‘आखिरी किला’ फतह करने की चुनौती है, जहाँ वे दशकों से सत्ता से दूर हैं। अंत में, बंगाल का ऐतिहासिक चुनावी पैटर्न, जहाँ सत्ता परिवर्तन दशकों बाद ही होता है, इस चुनाव को निर्णायक बनाता है कि क्या टीएमसी अपनी 15 साल की पारी को आगे बढ़ा पाएगी या भाजपा इतिहास बदलेगी।
West Bengal Assembly Elections 2026: अगले महीने पश्चिम बंगाल सहित देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, लेकिन बंगाल की चुनावी लड़ाई ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह चुनाव महज सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि ममता बनर्जी और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच एक बड़ी राजनीतिक प्रतिष्ठा की जंग बन चुका है। बंगाल के चुनाव को खास बनाने वाले पांच प्रमुख कारणों में सबसे ऊपर ‘चुनावी हिंसा’ है, जो यहाँ की राजनीति का एक काला हिस्सा रही है। दूसरा कारण ‘स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग रिवीजन’ (SIR) को लेकर उपजा विवाद है, जिसने मतदाता सूचियों और नागरिक पहचान के मुद्दे को भावनात्मक बना दिया है। तीसरा महत्वपूर्ण पहलू ममता बनर्जी का व्यक्तिगत कद है, जो उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा बनाता है। चौथा कारण भाजपा के लिए बंगाल को अपना ‘आखिरी किला’ फतह करने की चुनौती है, जहाँ वे दशकों से सत्ता से दूर हैं। अंत में, बंगाल का ऐतिहासिक चुनावी पैटर्न, जहाँ सत्ता परिवर्तन दशकों बाद ही होता है, इस चुनाव को निर्णायक बनाता है कि क्या टीएमसी अपनी 15 साल की पारी को आगे बढ़ा पाएगी या भाजपा इतिहास बदलेगी।