West Bengal Election 2026 First Phase: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का पहला चरण राजनीतिक दलों के लिए मात्र मतदान नहीं, बल्कि पूरे चुनाव का नैरेटिव सेट करने वाला रणक्षेत्र बन गया है। उत्तर बंगाल और सीमावर्ती जिलों की 54 सीटों पर होने वाला यह मुकाबला भाजपा और टीएमसी दोनों के लिए अग्निपरीक्षा है। 2021 के चुनावों में भाजपा ने इस क्षेत्र की 30 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि टीएमसी को 24 सीटों से संतोष करना पड़ा था। इस बार भाजपा के सामने अपने इस गढ़ को बचाने की चुनौती है, जहां उसे टिकट बंटवारे के कारण उभरी अंदरूनी गुटबाजी और ‘साइलेंट रिबेलियन’ का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, 15 साल से सत्ता में काबिज ममता बनर्जी की टीएमसी के लिए एंटी-इनकंबेंसी, भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे बड़ी बाधाएं हैं। भाजपा जहां हिंदुत्व, सीमा सुरक्षा और महिला सुरक्षा के कार्ड खेल रही है, वहीं ममता बनर्जी बंगाली अस्मिता और अपनी कल्याणकारी योजनाओं के दम पर वापसी की कोशिश में हैं। पहले चरण का परिणाम यह तय करेगा कि बंगाल में बदलाव की लहर चलेगी या ममता बनर्जी की सत्ता बरकरार रहेगी।
West Bengal Election 2026 First Phase: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का पहला चरण राजनीतिक दलों के लिए मात्र मतदान नहीं, बल्कि पूरे चुनाव का नैरेटिव सेट करने वाला रणक्षेत्र बन गया है। उत्तर बंगाल और सीमावर्ती जिलों की 54 सीटों पर होने वाला यह मुकाबला भाजपा और टीएमसी दोनों के लिए अग्निपरीक्षा है। 2021 के चुनावों में भाजपा ने इस क्षेत्र की 30 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि टीएमसी को 24 सीटों से संतोष करना पड़ा था। इस बार भाजपा के सामने अपने इस गढ़ को बचाने की चुनौती है, जहां उसे टिकट बंटवारे के कारण उभरी अंदरूनी गुटबाजी और ‘साइलेंट रिबेलियन’ का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, 15 साल से सत्ता में काबिज ममता बनर्जी की टीएमसी के लिए एंटी-इनकंबेंसी, भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे बड़ी बाधाएं हैं। भाजपा जहां हिंदुत्व, सीमा सुरक्षा और महिला सुरक्षा के कार्ड खेल रही है, वहीं ममता बनर्जी बंगाली अस्मिता और अपनी कल्याणकारी योजनाओं के दम पर वापसी की कोशिश में हैं। पहले चरण का परिणाम यह तय करेगा कि बंगाल में बदलाव की लहर चलेगी या ममता बनर्जी की सत्ता बरकरार रहेगी।