Vijay Ubale AIMIM Hindu Councillor: “हजार बर्क गिरे लाख आंधियां उठे वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं…” साहिर लुधियानवी का यह शेर विजय उबाले की कहानी पर सटीक बैठता है। महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने जहां 97 सीटों पर जीत हासिल की है, वहीं मुंबई के वार्ड नंबर 140 से जीतने वाले विजय उबाले एआईएमआईएम के इकलौते हिंदू पार्षद बनकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं।
ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने मुंबई के वार्ड 140 से विजय उबाले को अपना प्रत्याशी बनाया। विजय ने इस चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर दी और 16 अन्य प्रत्याशियों को हराते हुए 4945 वोटों से शानदार जीत हासिल कर ली। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो कुल पड़े वोटों का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा विजय के खाते में आया। दिलचस्प बात यह है कि जिस क्षेत्र से वे जीते हैं, वहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 50 प्रतिशत से भी अधिक थी, फिर भी जनता ने एक हिंदू चेहरे और ओवैसी की विचारधारा पर भरोसा जताया।
विजय उबाले की पृष्ठभूमि बेहद सामान्य और प्रेरणादायक है। वे पेशे से एक शिक्षक हैं और साल 2012 से शिक्षण कार्य (टीचिंग) कर रहे हैं। उन्होंने साल 2013 में मुंबई यूनिवर्सिटी से गणित (Mathematics) विषय में बीएससी (B.Sc) की डिग्री हासिल की थी। वे नौवीं, दसवीं और सीबीएसई के छात्रों को विज्ञान व वाणिज्य पढ़ाते हैं, साथ ही डिप्लोमा के छात्रों को गणित के गुर सिखाते हैं। अब उनके छात्र और क्षेत्र की जनता उन्हें ‘पार्षद जी’ के रूप में देख रही है।
विजय का पार्षद बनने तक का सफर अभावों और संघर्षों से भरा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी आर्थिक स्थिति इतनी सामान्य थी कि जब वे नामांकन के लिए एफिडेविट (शपथ पत्र) बनवाने गए, तो उनके पास वकील को देने के लिए ₹3000 भी नहीं थे। उन्होंने वकील से उधारी पर काम करवाया और दोस्तों-शुभचिंतकों के सहयोग से चुनाव लड़ा। उधारी के पैसों से नामांकन भरकर पार्षद बनने तक का यह सफर उनके जज्बे को बयां करता है।
Vijay Ubale AIMIM Hindu Councillor: “हजार बर्क गिरे लाख आंधियां उठे वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं…” साहिर लुधियानवी का यह शेर विजय उबाले की कहानी पर सटीक बैठता है। महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने जहां 97 सीटों पर जीत हासिल की है, वहीं मुंबई के वार्ड नंबर 140 से जीतने वाले विजय उबाले एआईएमआईएम के इकलौते हिंदू पार्षद बनकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं।
ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने मुंबई के वार्ड 140 से विजय उबाले को अपना प्रत्याशी बनाया। विजय ने इस चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर दी और 16 अन्य प्रत्याशियों को हराते हुए 4945 वोटों से शानदार जीत हासिल कर ली। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो कुल पड़े वोटों का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा विजय के खाते में आया। दिलचस्प बात यह है कि जिस क्षेत्र से वे जीते हैं, वहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 50 प्रतिशत से भी अधिक थी, फिर भी जनता ने एक हिंदू चेहरे और ओवैसी की विचारधारा पर भरोसा जताया।
विजय उबाले की पृष्ठभूमि बेहद सामान्य और प्रेरणादायक है। वे पेशे से एक शिक्षक हैं और साल 2012 से शिक्षण कार्य (टीचिंग) कर रहे हैं। उन्होंने साल 2013 में मुंबई यूनिवर्सिटी से गणित (Mathematics) विषय में बीएससी (B.Sc) की डिग्री हासिल की थी। वे नौवीं, दसवीं और सीबीएसई के छात्रों को विज्ञान व वाणिज्य पढ़ाते हैं, साथ ही डिप्लोमा के छात्रों को गणित के गुर सिखाते हैं। अब उनके छात्र और क्षेत्र की जनता उन्हें ‘पार्षद जी’ के रूप में देख रही है।
विजय का पार्षद बनने तक का सफर अभावों और संघर्षों से भरा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी आर्थिक स्थिति इतनी सामान्य थी कि जब वे नामांकन के लिए एफिडेविट (शपथ पत्र) बनवाने गए, तो उनके पास वकील को देने के लिए ₹3000 भी नहीं थे। उन्होंने वकील से उधारी पर काम करवाया और दोस्तों-शुभचिंतकों के सहयोग से चुनाव लड़ा। उधारी के पैसों से नामांकन भरकर पार्षद बनने तक का यह सफर उनके जज्बे को बयां करता है।