Vegetable Washing Viral Video: क्या आप जानते हैं कि जिस मंडी से आप बड़े चाव से ताजी सब्जियां घर लाते हैं, वहां आपकी सेहत के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ हो रहा है? हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जिसे देखकर किसी की भी रूह कांप जाए। 11 मार्च 2026 की यह घटना किसी व्यस्त सब्जी मंडी की लगती है, जहां एक वेंडर गंदे गटर के पानी में हाथ डालकर वहां से सब्जियां निकाल रहा है।
यह केवल एक वीडियो नहीं है, बल्कि देश के अलग-अलग कोनों से बार-बार सामने आने वाली एक ऐसी कड़वी सच्चाई है जो हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि क्या भारत में ‘हाइजीन’ शब्द ही बैन हो चुका है?
वायरल वीडियो में एक वेंडर, जो लाल टी-शर्ट में है, खुलेआम सड़क किनारे बह रहे गंदे और बदबूदार नाले के पानी में हाथ डालता है। कचरे से लबालब इस नाले में गिरे हुए प्याज को वह निकालकर वापस सब्जियों के कैरेट में रख देता है और उन्हीं गंदे हाथों से बाकी सब्जियों को भी छूता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बैकग्राउंड में आम लोग और दूसरे वेंडर्स भी दिख रहे हैं, लेकिन किसी को इस गंभीर स्वास्थ्य जोखिम से कोई फर्क पड़ता नजर नहीं आ रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि भारत में अब ‘सिविक सेंस’ के लिए एक बड़े जन आंदोलन की जरूरत है।
Vegetable Washing Viral Video: क्या आप जानते हैं कि जिस मंडी से आप बड़े चाव से ताजी सब्जियां घर लाते हैं, वहां आपकी सेहत के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ हो रहा है? हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जिसे देखकर किसी की भी रूह कांप जाए। 11 मार्च 2026 की यह घटना किसी व्यस्त सब्जी मंडी की लगती है, जहां एक वेंडर गंदे गटर के पानी में हाथ डालकर वहां से सब्जियां निकाल रहा है।
यह केवल एक वीडियो नहीं है, बल्कि देश के अलग-अलग कोनों से बार-बार सामने आने वाली एक ऐसी कड़वी सच्चाई है जो हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि क्या भारत में ‘हाइजीन’ शब्द ही बैन हो चुका है?
वायरल वीडियो में एक वेंडर, जो लाल टी-शर्ट में है, खुलेआम सड़क किनारे बह रहे गंदे और बदबूदार नाले के पानी में हाथ डालता है। कचरे से लबालब इस नाले में गिरे हुए प्याज को वह निकालकर वापस सब्जियों के कैरेट में रख देता है और उन्हीं गंदे हाथों से बाकी सब्जियों को भी छूता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बैकग्राउंड में आम लोग और दूसरे वेंडर्स भी दिख रहे हैं, लेकिन किसी को इस गंभीर स्वास्थ्य जोखिम से कोई फर्क पड़ता नजर नहीं आ रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि भारत में अब ‘सिविक सेंस’ के लिए एक बड़े जन आंदोलन की जरूरत है।