वंदे भारत में सेहत से खिलवाड़! सीधे प्लास्टिक पैकेट में गर्म कर परोसी जा रही रोटियां, वीडियो ने खोली पोल
Vande Bharat Express: इलाहाबाद से दिल्ली की यात्रा कर रही एक महिला यात्री ने आरोप लगाया कि ट्रेन में रोटी और कचौरी को सीधे सीलबंद प्लास्टिक पैकेट के साथ ही माइक्रोवेव में गर्म करके परोसा जा रहा था।
- Written By: मनोज आर्या
Vande Bharat Express Food Controversy: वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों की सेहत के साथ खिलवाड़ का एक गंभीर मामला सामने आया है। इलाहाबाद से दिल्ली की यात्रा कर रही एक महिला यात्री ने आरोप लगाया कि ट्रेन में रोटी और कचौरी को सीधे सीलबंद प्लास्टिक पैकेट के साथ ही माइक्रोवेव में गर्म करके परोसा जा रहा था। महिला ने जब पैकेट की जांच की तो पाया कि उस पर कहीं भी माइक्रोवेव-सेफ होने का उल्लेख नहीं था, बल्कि केवल ठंडी और सूखी जगह पर रखने के निर्देश दिए गए थे। वीडियो में ट्रेन स्टाफ ने भी स्वीकार किया कि पैकेट को सीधे माइक्रोवेव में गर्म किया गया है। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आईआरसीटीसी ने संज्ञान लिया और यात्री से विवरण मांगा है। विशेषज्ञों के अनुसार, गैर-प्रमाणित प्लास्टिक को गर्म करने पर हानिकारक रसायन भोजन में मिल सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। यह घटना रेलवे की कैटरिंग सेवा और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले मानकों पर बड़े सवाल खड़े करती है।
Vande Bharat Express Food Controversy: वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों की सेहत के साथ खिलवाड़ का एक गंभीर मामला सामने आया है। इलाहाबाद से दिल्ली की यात्रा कर रही एक महिला यात्री ने आरोप लगाया कि ट्रेन में रोटी और कचौरी को सीधे सीलबंद प्लास्टिक पैकेट के साथ ही माइक्रोवेव में गर्म करके परोसा जा रहा था। महिला ने जब पैकेट की जांच की तो पाया कि उस पर कहीं भी माइक्रोवेव-सेफ होने का उल्लेख नहीं था, बल्कि केवल ठंडी और सूखी जगह पर रखने के निर्देश दिए गए थे। वीडियो में ट्रेन स्टाफ ने भी स्वीकार किया कि पैकेट को सीधे माइक्रोवेव में गर्म किया गया है। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आईआरसीटीसी ने संज्ञान लिया और यात्री से विवरण मांगा है। विशेषज्ञों के अनुसार, गैर-प्रमाणित प्लास्टिक को गर्म करने पर हानिकारक रसायन भोजन में मिल सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। यह घटना रेलवे की कैटरिंग सेवा और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले मानकों पर बड़े सवाल खड़े करती है।
