गंदे कपड़ों पर मिली सजा ने ले ली जान! स्कूल में अपमानित महसूस करने वाली छात्रा ने घर जाकर किया सुसाइड- VIDEO
Kannauj News: कन्नौज जिले के सौरिक थाना क्षेत्र में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहां 10 वर्षीय छात्रा निधि ने शिक्षिका की डांट से क्षुब्ध होकर फांसी लगा ली।
- Written By: मनोज आर्या
Kannauj Student Suicide Case: कन्नौज जिले के सौरिक थाना क्षेत्र में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहां 10 वर्षीय छात्रा निधि ने शिक्षिका की डांट से क्षुब्ध होकर फांसी लगा ली। कक्षा पांच में पढ़ने वाली निधि शनिवार को बिना नहाए और गंदे कपड़ों में स्कूल गई थी, जिसके कारण एक शिक्षिका ने उसे सार्वजनिक रूप से फटकारा और कक्षा से बाहर निकाल दिया। इस अपमान से आहत होकर मासूम बच्ची रोते हुए घर पहुँची और अपनी मां की अनुपस्थिति में कमरे के अंदर साड़ी का फंदा बनाकर जान दे दी। छोटी बहन ने जब शव लटका देखा तो चीख पड़ी, जिसके बाद परिजनों ने स्कूल पहुँचकर भारी हंगामा किया। इस मामले में छात्रा की मां की तहरीर पर चार शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह घटना बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और स्कूलों में शिक्षकों के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मामूली लगने वाली डांट या मजाक बच्चों के लिए असहनीय मानसिक दबाव बन सकता है, जिससे बचाव के लिए अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों की भावनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है।
Kannauj Student Suicide Case: कन्नौज जिले के सौरिक थाना क्षेत्र में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहां 10 वर्षीय छात्रा निधि ने शिक्षिका की डांट से क्षुब्ध होकर फांसी लगा ली। कक्षा पांच में पढ़ने वाली निधि शनिवार को बिना नहाए और गंदे कपड़ों में स्कूल गई थी, जिसके कारण एक शिक्षिका ने उसे सार्वजनिक रूप से फटकारा और कक्षा से बाहर निकाल दिया। इस अपमान से आहत होकर मासूम बच्ची रोते हुए घर पहुँची और अपनी मां की अनुपस्थिति में कमरे के अंदर साड़ी का फंदा बनाकर जान दे दी। छोटी बहन ने जब शव लटका देखा तो चीख पड़ी, जिसके बाद परिजनों ने स्कूल पहुँचकर भारी हंगामा किया। इस मामले में छात्रा की मां की तहरीर पर चार शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह घटना बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और स्कूलों में शिक्षकों के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मामूली लगने वाली डांट या मजाक बच्चों के लिए असहनीय मानसिक दबाव बन सकता है, जिससे बचाव के लिए अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों की भावनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है।
