US Protest Against Donald Trump: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के खिलाफ ‘नो किंग्स’ (No Kings) आंदोलन ने एक व्यापक रूप ले लिया है, जिसे अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा एकदिवसीय अहिंसक विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है। देश के सभी 50 राज्यों में 3200 से अधिक रैलियां आयोजित की गईं, जिनमें लाखों लोगों ने सड़कों पर उतरकर ट्रंप की नीतियों को तानाशाही करार देते हुए लोकतंत्र बचाने की अपील की। वाशिंगटन, न्यूयॉर्क और लॉस एंजेलिस जैसे महानगरों के साथ-साथ इस बार इडाहो और यूटा जैसे कट्टर रिपब्लिकन राज्यों में भी भारी विरोध देखा गया है, जहाँ रैलियों में शामिल होने वालों की संख्या में 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इंडिविजिबल समूह के नेतृत्व में हो रहे इन प्रदर्शनों में व्हीलचेयर पर बैठे बुजुर्गों से लेकर आम जनता तक शामिल है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इन रैलियों को ‘ट्रंप डिरेंजमेंट सिंड्रोम’ कहकर खारिज कर दिया है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि रिपब्लिकन गढ़ों में पनपता यह असंतोष आगामी मध्यवधि चुनावों में ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
US Protest Against Donald Trump: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के खिलाफ ‘नो किंग्स’ (No Kings) आंदोलन ने एक व्यापक रूप ले लिया है, जिसे अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा एकदिवसीय अहिंसक विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है। देश के सभी 50 राज्यों में 3200 से अधिक रैलियां आयोजित की गईं, जिनमें लाखों लोगों ने सड़कों पर उतरकर ट्रंप की नीतियों को तानाशाही करार देते हुए लोकतंत्र बचाने की अपील की। वाशिंगटन, न्यूयॉर्क और लॉस एंजेलिस जैसे महानगरों के साथ-साथ इस बार इडाहो और यूटा जैसे कट्टर रिपब्लिकन राज्यों में भी भारी विरोध देखा गया है, जहाँ रैलियों में शामिल होने वालों की संख्या में 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इंडिविजिबल समूह के नेतृत्व में हो रहे इन प्रदर्शनों में व्हीलचेयर पर बैठे बुजुर्गों से लेकर आम जनता तक शामिल है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इन रैलियों को ‘ट्रंप डिरेंजमेंट सिंड्रोम’ कहकर खारिज कर दिया है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि रिपब्लिकन गढ़ों में पनपता यह असंतोष आगामी मध्यवधि चुनावों में ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।