मुसलमान रोबोट नहीं…2027 चुनाव से पहले यूपी में बढ़ने लगा सियासी पारा! अखिलेश को मजलिस का खुला चैलेंज
Uttar Pradesh Elections 2027: यूपी में मुस्लिम वोट बैंक को लेकर सियासत गरमाई, एआईएमआईएम ने अखिलेश यादव पर हमला बोला, मुसलमानों को “वोट रोबोट” समझने की राजनीति अब काम नहीं करेगी।
- Written By: अक्षय साहू
AIMIM Open Challenge to Akhilesh Yadav: यूपी की राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक को लेकर नई सियासी खींचतान शुरू हो गई है। अब तक जिस 20 फीसदी मुस्लिम आबादी को समाजवादी पार्टी का पक्का समर्थक माना जाता था, अब उसी को लेकर AIMIM ने खुला मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला करते हुए कहा कि मुसलमान कोई “वोट रोबोट” नहीं हैं, जिन्हें सिर्फ बटन दबाने के लिए इस्तेमाल किया जाए। AIMIM ने समाजवादी पार्टी पर “सियासी डकैती” के आरोप लगाए और मुजफ्फरनगर दंगों से लेकर 2017 और 2022 के चुनावी नतीजों तक की याद दिलाते हुए एक तरह की चार्जशीट पेश की। मजलिस का कहना है कि एमवाई यानी मुस्लिम–यादव समीकरण के नाम पर मुसलमानों को केवल बीजेपी को हराने का औजार समझा गया। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब 20 फीसदी आबादी ने 7 फीसदी वाले समाज को चार बार मुख्यमंत्री बनाया, तो क्या अब 7 फीसदी वाले कभी 20 फीसदी समाज को नेतृत्व सौंपने की हिम्मत दिखाएंगे? एआईएमआईएम का दावा है कि असदुद्दीन ओवैसी की बढ़ती लोकप्रियता से विरोधी घबराए हुए हैं। मजलिस का कहना है कि 2027 में वह किंगमेकर की भूमिका निभाएगी और मुस्लिम मुद्दों जैसे मॉब लिंचिंग, मस्जिद, मदरसा और खानकाह पर हमलों को मजबूती से उठाएगी।
AIMIM Open Challenge to Akhilesh Yadav: यूपी की राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक को लेकर नई सियासी खींचतान शुरू हो गई है। अब तक जिस 20 फीसदी मुस्लिम आबादी को समाजवादी पार्टी का पक्का समर्थक माना जाता था, अब उसी को लेकर AIMIM ने खुला मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला करते हुए कहा कि मुसलमान कोई “वोट रोबोट” नहीं हैं, जिन्हें सिर्फ बटन दबाने के लिए इस्तेमाल किया जाए। AIMIM ने समाजवादी पार्टी पर “सियासी डकैती” के आरोप लगाए और मुजफ्फरनगर दंगों से लेकर 2017 और 2022 के चुनावी नतीजों तक की याद दिलाते हुए एक तरह की चार्जशीट पेश की। मजलिस का कहना है कि एमवाई यानी मुस्लिम–यादव समीकरण के नाम पर मुसलमानों को केवल बीजेपी को हराने का औजार समझा गया। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब 20 फीसदी आबादी ने 7 फीसदी वाले समाज को चार बार मुख्यमंत्री बनाया, तो क्या अब 7 फीसदी वाले कभी 20 फीसदी समाज को नेतृत्व सौंपने की हिम्मत दिखाएंगे? एआईएमआईएम का दावा है कि असदुद्दीन ओवैसी की बढ़ती लोकप्रियता से विरोधी घबराए हुए हैं। मजलिस का कहना है कि 2027 में वह किंगमेकर की भूमिका निभाएगी और मुस्लिम मुद्दों जैसे मॉब लिंचिंग, मस्जिद, मदरसा और खानकाह पर हमलों को मजबूती से उठाएगी।
