वो व्हाट्सएप मैसेज… बगावत से राजतिलक तक की पूरी कहानी! कैसे ममता के ‘खास’ बने उनके सबसे बड़े दुश्मन?
West Bengal New CM: शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नया इतिहास रच दिया है। साल 2020 में एक व्हाट्सएप मैसेज से शुरू हुई उनकी बगावत आज राजतिलक में बदल गई है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
Suvendu Adhikari Oath Ceremony: कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में जब शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए मंच पर बढ़ रहे थे, तो उनके दिमाग में साल 2020 की वो यादें जरूर ताजा हो रही होंगी जब उन्होंने एक बड़ा जोखिम उठाया था। एक समय ममता बनर्जी के सबसे खास सिपाही रहे शुभेंदु आज उसी सत्ता के सुल्तान बन चुके हैं जिसे उन्होंने उखाड़ने की कसम खाई थी।
शुभेंदु अधिकारी के इस राजतिलक की नींव साल 2020 के दिसंबर महीने में ही पड़ गई थी। ममता बनर्जी को भेजे गए उनके एक व्हाट्सएप मैसेज ने बंगाल की राजनीति में वो तूफान खड़ा किया जिसने अंततः टीएमसी के बरगद जैसे साम्राज्य को हिला कर रख दिया। उस छोटे से संदेश में शुभेंदु ने साफ लिख दिया था कि वे अब उनके साथ काम नहीं कर सकते।
एक व्हाट्सएप मैसेज ने बदल दिया बंगाल का सियासी भूगोल
इस एक मैसेज ने ममता और शुभेंदु के सालों पुराने रिश्तों पर हमेशा के लिए पूर्णविराम लगा दिया था। दीदी ने उन्हें पार्टी छोड़ने वाला गद्दार और चंबल का डाकू तक कह दिया था, लेकिन शुभेंदु ने हार नहीं मानी। उन्हें अंदाजा था कि यह लड़ाई लंबी होगी, पर वे पीछे हटने को तैयार नहीं थे। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि व्हाट्सएप पर दिया गया वो इस्तीफा छह साल बाद उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी तक ले जाएगा। दिसंबर 2020 की वह दोपहर मिदनापुर के कॉलेज ग्राउंड में आज भी लोगों को याद है जब शुभेंदु ने अमित शाह की मौजूदगी में भगवा झंडा थामा था। उन्होंने मंच पर शाह के पैर छूकर यह संकल्प लिया था कि वे बंगाल के भूगोल और वोटर्स की नब्ज को पहचानकर बदलाव लाएंगे
Suvendu Adhikari Oath Ceremony: कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में जब शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए मंच पर बढ़ रहे थे, तो उनके दिमाग में साल 2020 की वो यादें जरूर ताजा हो रही होंगी जब उन्होंने एक बड़ा जोखिम उठाया था। एक समय ममता बनर्जी के सबसे खास सिपाही रहे शुभेंदु आज उसी सत्ता के सुल्तान बन चुके हैं जिसे उन्होंने उखाड़ने की कसम खाई थी।
शुभेंदु अधिकारी के इस राजतिलक की नींव साल 2020 के दिसंबर महीने में ही पड़ गई थी। ममता बनर्जी को भेजे गए उनके एक व्हाट्सएप मैसेज ने बंगाल की राजनीति में वो तूफान खड़ा किया जिसने अंततः टीएमसी के बरगद जैसे साम्राज्य को हिला कर रख दिया। उस छोटे से संदेश में शुभेंदु ने साफ लिख दिया था कि वे अब उनके साथ काम नहीं कर सकते।
एक व्हाट्सएप मैसेज ने बदल दिया बंगाल का सियासी भूगोल
इस एक मैसेज ने ममता और शुभेंदु के सालों पुराने रिश्तों पर हमेशा के लिए पूर्णविराम लगा दिया था। दीदी ने उन्हें पार्टी छोड़ने वाला गद्दार और चंबल का डाकू तक कह दिया था, लेकिन शुभेंदु ने हार नहीं मानी। उन्हें अंदाजा था कि यह लड़ाई लंबी होगी, पर वे पीछे हटने को तैयार नहीं थे। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि व्हाट्सएप पर दिया गया वो इस्तीफा छह साल बाद उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी तक ले जाएगा। दिसंबर 2020 की वह दोपहर मिदनापुर के कॉलेज ग्राउंड में आज भी लोगों को याद है जब शुभेंदु ने अमित शाह की मौजूदगी में भगवा झंडा थामा था। उन्होंने मंच पर शाह के पैर छूकर यह संकल्प लिया था कि वे बंगाल के भूगोल और वोटर्स की नब्ज को पहचानकर बदलाव लाएंगे
