Sudesh Bhosale Exclusive Interview: मशहूर गायक और मिमिक्री आर्टिस्ट सुदेश भोसले ने नवभारत पॉडकास्ट में अपनी जीवन यात्रा और संघर्ष के दिलचस्प किस्से साझा किए। अमिताभ बच्चन की आवाज के रूप में पहचाने जाने वाले सुदेश भोसले ने बताया कि उनकी शुरुआत एक पोस्टर पेंटर के रूप में हुई थी, जहां वह घंटों फिल्मी पोस्टर्स चित्रित करते थे। संगीत उन्हें विरासत में मिला, लेकिन मिमिक्री और गायकी की दुनिया में उनका प्रवेश इत्तेफाक और कड़ी मेहनत का परिणाम था। उन्होंने याद किया कि कैसे 14 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार पोस्टर पेंटिंग की और 1982 तक इसी पेशे में सक्रिय रहे। सुदेश भोसले ने बताया कि ‘जुम्मा चुम्मा’ गाने ने उनके करियर को एक नई दिशा दी और उन्हें ‘प्लेबैक सिंगर’ के रूप में स्थापित किया। उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ काम करने के अपने अनुभवों को साझा करते हुए उनकी अनुशासनप्रियता और काम के प्रति समर्पण की सराहना की। पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने किशोर कुमार, मोहम्मद रफी और मन्ना डे जैसे महान गायकों को याद किया और उनकी आवाजों में गाकर समां बांध दिया। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और कड़ी मेहनत व अनुशासन ही लंबी रेस का घोड़ा बनाते हैं।
Sudesh Bhosale Exclusive Interview: मशहूर गायक और मिमिक्री आर्टिस्ट सुदेश भोसले ने नवभारत पॉडकास्ट में अपनी जीवन यात्रा और संघर्ष के दिलचस्प किस्से साझा किए। अमिताभ बच्चन की आवाज के रूप में पहचाने जाने वाले सुदेश भोसले ने बताया कि उनकी शुरुआत एक पोस्टर पेंटर के रूप में हुई थी, जहां वह घंटों फिल्मी पोस्टर्स चित्रित करते थे। संगीत उन्हें विरासत में मिला, लेकिन मिमिक्री और गायकी की दुनिया में उनका प्रवेश इत्तेफाक और कड़ी मेहनत का परिणाम था। उन्होंने याद किया कि कैसे 14 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार पोस्टर पेंटिंग की और 1982 तक इसी पेशे में सक्रिय रहे। सुदेश भोसले ने बताया कि ‘जुम्मा चुम्मा’ गाने ने उनके करियर को एक नई दिशा दी और उन्हें ‘प्लेबैक सिंगर’ के रूप में स्थापित किया। उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ काम करने के अपने अनुभवों को साझा करते हुए उनकी अनुशासनप्रियता और काम के प्रति समर्पण की सराहना की। पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने किशोर कुमार, मोहम्मद रफी और मन्ना डे जैसे महान गायकों को याद किया और उनकी आवाजों में गाकर समां बांध दिया। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और कड़ी मेहनत व अनुशासन ही लंबी रेस का घोड़ा बनाते हैं।