Strait of Hormuz: दुनिया भर के तेल आयात के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते ‘होरमुज जलडमरूमध्य’ पर संकट गहरा गया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर बुरा असर पड़ना तय माना जा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की लंबी वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई है। परमाणु मुद्दे पर सहमति न बन पाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिकी नौसेना होरमुज से गुजरने वाले जहाजों की नाकाबंदी करेगी। इस तनाव का तत्काल असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखा और ब्रेंट क्रूड की कीमतें 8% उछलकर $90 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रास्ता खुल भी जाता है, तो भी सप्लाई चेन को सामान्य होने में जुलाई तक का समय लग सकता है। वर्तमान में खाड़ी में लगभग 400 तेल से लदे टैंकर बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि अंदर जाने के लिए खाली टैंकरों की भारी कमी है। शिपिंग कंपनियां और बीमा एजेंसियां युद्धविराम के अभाव में अपने जहाजों को वहां भेजने से डर रही हैं। इसका असर केवल तेल ही नहीं, बल्कि वैश्विक खाद आपूर्ति पर भी पड़ेगा, क्योंकि दुनिया की 30% खाद इसी रास्ते से गुजरती है। पिछले छह हफ्तों से उत्पादन ठप होने के कारण आने वाले महीनों में जरूरी सामानों की भारी किल्लत और महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।
Strait of Hormuz: दुनिया भर के तेल आयात के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते ‘होरमुज जलडमरूमध्य’ पर संकट गहरा गया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर बुरा असर पड़ना तय माना जा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की लंबी वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई है। परमाणु मुद्दे पर सहमति न बन पाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिकी नौसेना होरमुज से गुजरने वाले जहाजों की नाकाबंदी करेगी। इस तनाव का तत्काल असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखा और ब्रेंट क्रूड की कीमतें 8% उछलकर $90 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रास्ता खुल भी जाता है, तो भी सप्लाई चेन को सामान्य होने में जुलाई तक का समय लग सकता है। वर्तमान में खाड़ी में लगभग 400 तेल से लदे टैंकर बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि अंदर जाने के लिए खाली टैंकरों की भारी कमी है। शिपिंग कंपनियां और बीमा एजेंसियां युद्धविराम के अभाव में अपने जहाजों को वहां भेजने से डर रही हैं। इसका असर केवल तेल ही नहीं, बल्कि वैश्विक खाद आपूर्ति पर भी पड़ेगा, क्योंकि दुनिया की 30% खाद इसी रास्ते से गुजरती है। पिछले छह हफ्तों से उत्पादन ठप होने के कारण आने वाले महीनों में जरूरी सामानों की भारी किल्लत और महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।