सीतापुर मंदिर पर बुलडोजर चलाने से डरा ड्राइवर, मंदिर ढहाया गया, हाथ जोड़े खड़ी रहीं एसडीएम
Sitapur Mandir Demolition: सीतापुर में सड़क चौड़ीकरण के दौरान एक दुर्गा मंदिर को बुलडोजर से हटाए जाने का मामला सामने आया है। एसडीएम कार्रवाई के समय हाथ जोड़कर खड़ी रहीं।
- Written By: सजल रघुवंशी
Uttar Pradesh News: सीतापुर में सड़क चौड़ीकरण के दौरान एक दुर्गा मंदिर को बुलडोजर से हटाए जाने का मामला सामने आया है। करीब 25 साल पुराने इस मंदिर को हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि एसडीएम कार्रवाई के समय हाथ जोड़कर खड़ी रहीं, जबकि नायब तहसीलदार ने खुद हथौड़ी-छेनी की मदद से स्थापित मूर्ति को आधार से अलग किया। सरकारी बुलडोजर चालक ने मंदिर तोड़ने से मना कर दिया, जिसके बाद निजी चालक बुलाकर ढांचा गिराया गया। यह कार्रवाई शहर कोतवाली क्षेत्र में कैप्टन मनोज पांडेय चौराहे के पास सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत की गई। प्रशासन का कहना है कि सड़क को चौड़ा करने के लिए मंदिर को हटाना आवश्यक था। एसडीएम के मुताबिक, शनिवार को यह अभियान शुरू किया गया और मंदिर की मूर्ति को शहर के शक्ति मंदिर में सुरक्षित स्थानांतरित कर दिया गया है। वहीं, मंदिर हटाए जाने को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि खरमास के दौरान मंदिर को नहीं तोड़ा जाना चाहिए था।
Uttar Pradesh News: सीतापुर में सड़क चौड़ीकरण के दौरान एक दुर्गा मंदिर को बुलडोजर से हटाए जाने का मामला सामने आया है। करीब 25 साल पुराने इस मंदिर को हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि एसडीएम कार्रवाई के समय हाथ जोड़कर खड़ी रहीं, जबकि नायब तहसीलदार ने खुद हथौड़ी-छेनी की मदद से स्थापित मूर्ति को आधार से अलग किया। सरकारी बुलडोजर चालक ने मंदिर तोड़ने से मना कर दिया, जिसके बाद निजी चालक बुलाकर ढांचा गिराया गया। यह कार्रवाई शहर कोतवाली क्षेत्र में कैप्टन मनोज पांडेय चौराहे के पास सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत की गई। प्रशासन का कहना है कि सड़क को चौड़ा करने के लिए मंदिर को हटाना आवश्यक था। एसडीएम के मुताबिक, शनिवार को यह अभियान शुरू किया गया और मंदिर की मूर्ति को शहर के शक्ति मंदिर में सुरक्षित स्थानांतरित कर दिया गया है। वहीं, मंदिर हटाए जाने को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि खरमास के दौरान मंदिर को नहीं तोड़ा जाना चाहिए था।
