Saurabh Bhardwaj Slams BJP on Sonam Wangchuk Case: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और प्रसिद्ध वैज्ञानिक सोनम वांगचुक को बिना किसी ठोस सबूत के 170 दिन तक जेल में रखा गया, लेकिन अब उन्हें रिहा किया जा रहा है। इस मामले पर आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने केंद्र की मोदी सरकार पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए बताया कि लगभग छह महीने पहले वांगचुक को एनएसए के तहत गिरफ्तार किया गया था। यह वही वैज्ञानिक हैं जिन्होंने भारतीय सेना के लिए कई महत्वपूर्ण आविष्कार किए और गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए विश्व स्तर पर पहचान बनाई। सरकार ने उनकी गिरफ्तारी का दावा किया कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं। उनकी पत्नी सुप्रीम कोर्ट में लगातार हैबियस कॉरपस रिट दायर करती रहीं, लेकिन सरकार द्वारा बहानों और देरी के कारण केस लंबित रहा। मीडिया में झूठी खबरें फैलाई गईं कि वांगचुक अवैध पैसा ले रहे हैं और देशद्रोही हैं। जब सुप्रीम कोर्ट में सबूत पेश किए जाने थे, तब सरकार ने गलत तरीके से वीडियो प्रस्तुत कर झूठा मुकदमा तैयार किया। अंततः सुप्रीम कोर्ट के सामने सरकार ने डिटेंशन आदेश वापस ले लिया, जिससे स्पष्ट हुआ कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था। यह मामला लोकतंत्र और मीडिया की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल उठाता है। सोनम वांगचुक के समर्थन में खड़ा होना जरूरी है ताकि शांतिपूर्ण आंदोलनों और जायज मांगों को दबाया न जा सके।
Saurabh Bhardwaj Slams BJP on Sonam Wangchuk Case: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और प्रसिद्ध वैज्ञानिक सोनम वांगचुक को बिना किसी ठोस सबूत के 170 दिन तक जेल में रखा गया, लेकिन अब उन्हें रिहा किया जा रहा है। इस मामले पर आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने केंद्र की मोदी सरकार पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए बताया कि लगभग छह महीने पहले वांगचुक को एनएसए के तहत गिरफ्तार किया गया था। यह वही वैज्ञानिक हैं जिन्होंने भारतीय सेना के लिए कई महत्वपूर्ण आविष्कार किए और गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए विश्व स्तर पर पहचान बनाई। सरकार ने उनकी गिरफ्तारी का दावा किया कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं। उनकी पत्नी सुप्रीम कोर्ट में लगातार हैबियस कॉरपस रिट दायर करती रहीं, लेकिन सरकार द्वारा बहानों और देरी के कारण केस लंबित रहा। मीडिया में झूठी खबरें फैलाई गईं कि वांगचुक अवैध पैसा ले रहे हैं और देशद्रोही हैं। जब सुप्रीम कोर्ट में सबूत पेश किए जाने थे, तब सरकार ने गलत तरीके से वीडियो प्रस्तुत कर झूठा मुकदमा तैयार किया। अंततः सुप्रीम कोर्ट के सामने सरकार ने डिटेंशन आदेश वापस ले लिया, जिससे स्पष्ट हुआ कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था। यह मामला लोकतंत्र और मीडिया की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल उठाता है। सोनम वांगचुक के समर्थन में खड़ा होना जरूरी है ताकि शांतिपूर्ण आंदोलनों और जायज मांगों को दबाया न जा सके।