Deepshikha Chadhar Murder Case: मध्य प्रदेश के सागर जिले के शाहगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के गेट पर स्टाफ नर्स दीपशिखा चढ़ार की गोली मारकर हत्या के मामले में पुलिस की शुरुआती जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार इस सनसनीखेज हत्याकांड को नर्स के मौसेरे भाई सुशील आठ्या ने अंजाम दिया है, जो दीपशिखा से शादी करना चाहता था। हत्या के दूसरे दिन गुरुवार को भी आरोपी सुशील आठ्या का कोई सुराग नहीं मिल सका। घटना के बाद से वह जंगल की ओर भागा हुआ बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कई टीमें गठित कर अलग-अलग इलाकों में दबिश दी है। नर्स दीपशिखा की हत्या की खबर मिलते ही गुरुवार को जबलपुर के पठार गांव से उसके परिजन सागर-छतरपुर मार्ग पर पहुंचकर चक्काजाम कर प्रदर्शन किया। परिजनों ने आरोपी की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया है और अंतिम संस्कार गांव में किया जाएगा। पुलिस के मुताबिक दीपशिखा और सुशील पहले जबलपुर में साथ रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते थे। बाद में दीपशिखा का चयन स्टाफ नर्स के पद पर हो गया और तीन साल पहले उसकी पोस्टिंग शाहगढ़ सीएचसी में हुई। इसके बाद वह शाहगढ़ आ गई, जबकि सुशील जबलपुर में रहकर एक निजी कंपनी में काम करने लगा।
Deepshikha Chadhar Murder Case: मध्य प्रदेश के सागर जिले के शाहगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के गेट पर स्टाफ नर्स दीपशिखा चढ़ार की गोली मारकर हत्या के मामले में पुलिस की शुरुआती जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार इस सनसनीखेज हत्याकांड को नर्स के मौसेरे भाई सुशील आठ्या ने अंजाम दिया है, जो दीपशिखा से शादी करना चाहता था। हत्या के दूसरे दिन गुरुवार को भी आरोपी सुशील आठ्या का कोई सुराग नहीं मिल सका। घटना के बाद से वह जंगल की ओर भागा हुआ बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कई टीमें गठित कर अलग-अलग इलाकों में दबिश दी है। नर्स दीपशिखा की हत्या की खबर मिलते ही गुरुवार को जबलपुर के पठार गांव से उसके परिजन सागर-छतरपुर मार्ग पर पहुंचकर चक्काजाम कर प्रदर्शन किया। परिजनों ने आरोपी की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया है और अंतिम संस्कार गांव में किया जाएगा। पुलिस के मुताबिक दीपशिखा और सुशील पहले जबलपुर में साथ रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते थे। बाद में दीपशिखा का चयन स्टाफ नर्स के पद पर हो गया और तीन साल पहले उसकी पोस्टिंग शाहगढ़ सीएचसी में हुई। इसके बाद वह शाहगढ़ आ गई, जबकि सुशील जबलपुर में रहकर एक निजी कंपनी में काम करने लगा।