संसद में राहुल गांधी ने सुनाई ‘जादूगर’ की कहानी, महिला आरक्षण बिल के बहाने सरकार पर कसा तंज- VIDEO
Rahul Gandhi: संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बेहद अनोखे और मजाकिया अंदाज में मोदी सरकार पर हमला बोला।
- Written By: मनोज आर्या
https://youtu.be/R18DL4UoF3w?si=-CaezDrXuaJBDr1G
Rahul Gandhi Speech: संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बेहद अनोखे और मजाकिया अंदाज में मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत अपनी बहन प्रियंका गांधी द्वारा अमित शाह को मुस्कुराने पर मजबूर करने के किस्से से की और फिर बचपन की एक ‘जादूगर’ की कहानी सुनाई। राहुल गांधी ने बताया कि कैसे एक जादूगर अपने ही करतब में फंस गया और उसकी एक गलती के कारण बच्चों के सामने उसका पूरा जादू फीका पड़ गया। इस कहानी के माध्यम से उन्होंने परोक्ष रूप से सरकार की नीतियों और महिला आरक्षण बिल में परिसीमन व जनगणना की शर्तों को एक ‘जादू’ बताया जो समय आने पर असफल साबित होगा। राहुल गांधी ने सदन में खुद को एक ‘आर्टिस्ट’ और ‘पेंटर’ बताते हुए कहा कि उनकी बातों का सार अंत में एक पहेली की तरह फिट हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने महिला आरक्षण का वादा तो किया है, लेकिन उसे परिसीमन और जनगणना जैसी जटिल शर्तों में बांधकर भविष्य के लिए टाल दिया है।
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Rahul Gandhi Speech: संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बेहद अनोखे और मजाकिया अंदाज में मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत अपनी बहन प्रियंका गांधी द्वारा अमित शाह को मुस्कुराने पर मजबूर करने के किस्से से की और फिर बचपन की एक ‘जादूगर’ की कहानी सुनाई। राहुल गांधी ने बताया कि कैसे एक जादूगर अपने ही करतब में फंस गया और उसकी एक गलती के कारण बच्चों के सामने उसका पूरा जादू फीका पड़ गया। इस कहानी के माध्यम से उन्होंने परोक्ष रूप से सरकार की नीतियों और महिला आरक्षण बिल में परिसीमन व जनगणना की शर्तों को एक ‘जादू’ बताया जो समय आने पर असफल साबित होगा। राहुल गांधी ने सदन में खुद को एक ‘आर्टिस्ट’ और ‘पेंटर’ बताते हुए कहा कि उनकी बातों का सार अंत में एक पहेली की तरह फिट हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने महिला आरक्षण का वादा तो किया है, लेकिन उसे परिसीमन और जनगणना जैसी जटिल शर्तों में बांधकर भविष्य के लिए टाल दिया है।
